शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे और कांग्रेस आलाकमान के साथ हुई अहम बैठकों के बाद भी हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। पार्टी नेतृत्व जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन के सभी पहलुओं पर मंथन कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व का मुख्य फोकस अब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों पर है। पार्टी चाहती है कि सरकार और संगठन में विभिन्न क्षेत्रों, जातीय समूहों और सामाजिक वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले, ताकि चुनाव से पहले मजबूत राजनीतिक संदेश दिया जा सके।


नए चेहरों और पुराने समीकरणों के बीच फंसा फैसला
मंत्रिमंडल में नए चेहरों को मौका देने और मौजूदा शक्ति संतुलन बनाए रखने के बीच समीकरण साधना कांग्रेस के लिए चुनौती बना हुआ है। दिल्ली में हुई बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में संभावित फेरबदल पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।


सरकार के प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रभावशीलता को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण विभागों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में विभागों के पुनर्गठन और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की तस्वीर सामने आ सकती है।


फिलहाल मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद इतना स्पष्ट है कि मंत्रिमंडल विस्तार का मामला कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के विचाराधीन है, लेकिन अंतिम निर्णय के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।


दिल्ली बैठकों में नेताओं के हिमाचल दौरे पर भी चर्चा
दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के हिमाचल दौरे को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी इसी माह सोलन में बड़ी जनसभा को संबोधित कर सकते हैं, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा का मंडी दौरा पहले से प्रस्तावित कार्यक्रमों में शामिल है।


सुक्खू ने इन नेताओं से की मुलाकात
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शुक्रवार शाम दिल्ली दौरे के बाद चंडीगढ़ से सड़क मार्ग के जरिए शिमला लौटे। दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल से मुलाकात की।


इन बैठकों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सुक्खू की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ अलग से भी विस्तृत चर्चा हुई।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में किन नए चेहरों को जगह मिलती है और विभागों के बंटवारे में क्या बदलाव किया जाता है।