युद्ध क्षेत्र, मलबे, तंग सुरंगों और संकरे इलाकों में स्नेक रोबोट की मदद से हर गतिविधि पर नजर रहेगी। यह सेना समेत सुरक्षा एजेंसियों के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है। जवाहर लाल राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज (जेएनजीईसी) सुंदरनगर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों ने स्नेक रोबोट का मॉडल बनाया है। ड्रैगन जैसी गतिशीलता प्रदर्शित करने वाली यह प्रणाली उन स्थानों तक पहुंच सकती है, जहां पारंपरिक रोबोट असमर्थ होते हैं। इस मॉडल की प्रेरणा डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) रोबोटिक स्नेक मॉडल से मिली है।

रोबोटिक स्नेक को इस प्रकार प्रोग्राम किया गया है कि यह कई प्रकार के मोशन को अपना सकता है। यह लेटरल अनड्युलेशन, साइडवाइंडिंग और कॉसर्टिना मोशन जैसी उन्नत चालों का उपयोग कर सकेगा। लेटरल अनड्युलेशन में रोबोट एस आकार में लहराते हुए आगे बढ़ता है जबकि साइडवाइंडिंग तकनीक उसे तिरछे होकर ढीली या फिसलन भरी सतहों पर आसानी से चलने में मदद करती है। इसके अलावा कॉसर्टिना मोशन रोबोट को अपने शरीर को सिकोड़-फैलाकर संकरी पाइपों और तंग स्थानों में प्रवेश की क्षमता देता है।

इस कारण यह रोबोट मलबे, तंग नलिकाओं, असमतल सतहों और संकुचित स्थानों से आसानी से गुजर सकता है। रोबोट में अल्ट्रासोनिक सेंसर, आईएमयू मॉड्यूल और लो-लाइट कैमरा यूनिट शामिल किए गए हैं, जिनसे यह विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी रूप से काम कर पाता है। आईएमयू मॉड्यूल रोबोट की दिशा, झुकाव और गति पर निरंतर निगरानी रखता है। इस मॉडल को जीवन सिंह, आयुष भारद्वाज, राजशेखर पांडा, आर्यन ठाकुर, नवप्रीत और हरप्रीत सिंह ने विकसित किया है।
 

इस परियोजना में यांत्रिक इंजीनियरिंग के कई उन्नत पहलू भी शामिल हैं, जिनमें सटीक संयुक्त गति नियंत्रण, सर्वो-सिंक्ट्रोनाइजेशन, वितरित भार संतुलन और लो-पावर एंबेडेड कंट्रोल आर्किटेक्चर प्रमुख हैं। – अक्षय कंवर प्रोजेक्ट मेंटर