
हिमाचल प्रदेश सरकार प्रशासनिक खर्चों में कटौती के लिए सरकारी वाहनों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव है कि अब वरिष्ठ अधिकारियों को केवल एक ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाए। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों का अतिरिक्त प्रभार होने के कारण कई सरकारी गाड़ियां हैं, उनसे अतिरिक्त वाहन वापस लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव पर सरकार स्तर पर मंथन जारी है। वर्तमान में कई सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारियों के पास अलग-अलग विभागों के नाम पर एक से अधिक सरकारी वाहन उपलब्ध हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग और संबंधित विभागों की ओर से अलग-अलग वाहन आवंटित किए जाने से उनके रखरखाव, ईंधन और चालकों पर सरकार का खर्च बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि एक अधिकारी अपने सभी विभागीय कार्यों के लिए एक ही वाहन का उपयोग कर सकता है। ऐसे में अतिरिक्त वाहनों की जरूरत नहीं है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सभी विभागों से अधिकारियों के पास उपलब्ध सरकारी वाहनों का विस्तृत ब्योरा मांगा जा सकता है। इसके आधार पर अतिरिक्त वाहनों की पहचान कर उन्हें वापस लिया जाएगा।
सरकार की योजना है कि लौटाए गए वाहनों को उन विभागों और फील्ड कार्यालयों में भेजा जाए, जहां वाहनों की वास्तविक आवश्यकता है। इससे एक ओर सरकारी खर्च में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बल्कि सीमित संसाधनों का अधिक दक्षता के साथ उपयोग होगा और अनावश्यक खर्चों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो सरकारी वाहनों के आवंटन की मौजूदा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।
