हिमाचल रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बद्दी में हिमाचल वन हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े एक मामले में कहा है कि बिना कंप्लीशन व ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के फ्लैट का पजेशन देना वैध नहीं है। रेरा के अध्यक्ष आरडी धीमान और सदस्य विधुर मेहता की पीठ ने डेवलपर और प्रमोटर के खिलाफ फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि बिल्डर तीन महीने में पूरे प्रोजेक्ट के लिए कंप्लीशन और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट हासिल करे। ऐसा नहीं करने पर प्रतिदिन 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

यह शिकायत पंचकूला निवासी खरीदार ने दायर की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उन्हें जुलाई 2019 में पजेशन दे दिया गया, लेकिन प्रोजेक्ट में बिजली के कॉमन कनेक्शन, स्वतंत्र पानी कनेक्शन, सीवरेज और चालू लिफ्ट जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद उनसे 3.85 लाख और 1.03 लाख के भारी-भरकम मेंटेनेंस शुल्क की मांग की गई। आरोप यह भी था कि बिल्डर ने राशि प्रोजेक्ट खाते के बजाय अपने निजी बचत खाते में जमा करवाने को कहा और भुगतान न करने पर अलॉटमेंट रद्द करने की धमकी दी।

बिल्डर ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता आदतन मुकदमेबाज हैं और फ्लैट किराये पर देकर 5.70 लाख से अधिक की आय अर्जित कर चुके हैं, जिससे यह साबित होता है कि सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हालांकि, अथॉरिटी ने माना कि शिकायतकर्ता फ्लैट के भौतिक कब्जे में हैं और उससे लाभ भी कमा रहे हैं, इसलिए वे पूरी तरह मेंटेनेंस शुल्क से मुक्त नहीं हो सकते। बिना वास्तविक सेवाओं के आधार पर मनमाना शुल्क नहीं ले सकते। रेरा ने बिल्डर को एक माह में आरडब्ल्यूए की मीटिंग बुलाने के निर्देश दिए हैं।