
हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत मामले में सीबीआई और शिमला पुलिस आमने सामने आ गई है। शिमला पुलिस के एसएसपी ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर सीबीआई पर कोर्ट में झूठी स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कोर्ट में गलत तथ्य पेश करने पर सीबीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने की मांग की है। उधर, सीबीआई ने भी शिमला पुलिस की एसआईटी पर ही जांच केंद्रित कर दी है।
विमल नेगी मौत मामले में नामजद अधिकारियों पर कार्रवाई के स्थान पर सीबीआई ने निलंबित एएसआई पंकज शर्मा को साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया है। सीबीआई एसएसपी शिमला सहित एसआईटी के अधिकारियों को पत्र जारी कर पूछताछ के लिए कई बार दिल्ली तलब कर चुकी है। सीबीआई ने दावा किया है कि एएसआई पंकज को एसएसपी शिमला ने बिलासपुर भेजा था, जबकि वह एसआईटी का सदस्य नहीं था। सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में शिमला पुलिस की एसआईटी की जांच में गंभीर खामियां और विरोधाभास का जिक्र किया है।
एसएसपी शिमला ने हाईकोर्ट में दिए शपथ पत्र में सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने और न्यायिक रिकॉर्ड से धोखाधड़ी करने का प्रयास करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि सीबीआई ने मनगढ़ंत कहानी बनाई है। यह अनजाने में हुई गलती नहीं है, बल्कि मिलीभगत के तहत जान-बूझकर ऐसा किया गया, इसलिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 227, 228, 229, 336, 337 और 338 के तहत सीबीआई पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। तर्क दिया है कि शिमला पुलिस की एसआईटी ने 90 फीसदी जांच पूरी कर दी थी और सीबीआई इससे आगे नहीं बढ़ पा रही है। एसएसपी ने सीबीआई निदेशक दिल्ली, मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार और डीजीपी हिमाचल को भी इसे लेकर पत्र लिखा है।
सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में चल रही वित्तीय गड़बड़ियों की जांच प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने की बात कही है। सीबीआई ने जांच के आधार पर बताया है कि कैबिनेट की मंजूरी के बिना नियमों का उल्लंघन कर परियोजना का अधिग्रहण किया। टेंडर से पहले जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। पेखूवाला प्रोजेक्ट में अधूरे काम के बावजूद भुगतान करने और गैर कानूनी निर्देशों को लागू करने के लिए दबाव बनाने का भी उल्लेख किया गया है।
