
शिमला शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। राजधानी में बार-बार लोगों को काट रहे लावारिस कुत्तों को अब नगर निगम डॉग शेल्टर में ही रखेगा। इन्हें पकड़ने के बाद अब वापस नहीं छोड़ा जाएगा। नगर निगम खुद शेल्टर में इन्हें पालने का जिम्मा उठाएगा। नगर निगम सदन में सोमवार को इस मामले पर विस्तृत चर्चा हुई। पार्षद निशा ठाकुर ने शहर में लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक का मामला उठाया।
इस पर आयुक्त ने कहा कि कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट चिह्नित किए जा रहे हैं।
इनके अलावा खुले में लावारिस कुत्तों को खाना खिलाने पर अब निगम पांच हजार रुपये तक चालान काटेगा। सेनेटरी इंस्पेक्टरों को इस बारे में निर्देश भी जारी कर दिए हैं। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने लावारिस कुत्तों और बंदरों से राहत दिलाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि निगम इनसे राहत के लिए सख्त कदम उठाए। आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि जो कुत्ते कई बार लोगों को काट चुके हैं, उन्हें अब हमेशा के लिए डॉग शेल्टर में रखा जाएगा।
हले ऐसे कुत्तों को पकड़ने के बाद अधिकतम दस दिन के लिए डॉग शेल्टर में रखा जाता था। इसके बाद इन्हें वापस उसी जगह छोड़ना पड़ता था जहां से इन्हें पकड़ा गया हो। अब डॉग रूल्स में बदलाव होने के बाद ऐसे कुत्तों की पहचान की जाएगी जो अब तक कम से कम 7-8 लोगों को काट चुके हैं। पार्षद और लोग भी इनके बारे में निगम को सूचना दे सकते हैं। निगम इन्हें पकड़कर टुटीकंडी में बने डॉग शेल्टर में रखेगा। इनको पालने के लिए निगम ही बजट देगा। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने पालतू कुत्तों का पंजीकरण न होने पर सवाल उठाए।
सदन ने फैसला लिया कि अब सभी पालतू कुत्तों का भी पंजीकरण संस्था के जरिये पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। संस्था घर-घर जाकर पंजीकरण करेगी और एंटी रैबीज के टीके भी लगाएगी जो लोग पंजीकरण नहीं करवाएंगे, उनके दो हजार रुपये तक के चालान काटे जाएंगे। वहीं सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे सैहब सोसायटी के कर्मचारियों को बीमा सुरक्षा मिलेगी। पार्षद सिमी नंदा के सवाल पर निगम प्रशासन ने जवाब दिया कि इस पर काम हो रहा है। पार्षद रामरत्न वर्मा ने निगम की संपत्तियां कंपनी को न सौंपने का प्रस्ताव लगाया। पार्षद कल्याण धीमान ने जन्म मृत्यु जैसे मौकों पर पानी की जरूरत पड़ने पर निशुल्क टैंकर देने की मांग रखी।
