हिमाचल प्रदेश में बारिश और भूस्खलन से नुकसान का दौर जारी है। शुक्रवार को कुल्लू के सैंज में पहाड़ी दरकने से 14 परिवारों के 60 लोगों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दोपहर में सैंज घाटी की देहुरीधार पंचायत के दरमेढा गांव के पीछे की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। भारी भरकम चट्टानें, पत्थर और मलबा गिरने से गांव के लोग जान बचाकर सुरक्षित जगह की तरफ भागे। शाम तक रुक-रुक भूस्खलन का क्रम जारी रहा। सभी लोगों ने अपने-अपने रिश्तेदारों और परिचितों के घरों में शरण ली है। उधर, प्रशासन ने सभी ग्रामीणों को रोपा स्थित रेस्टहाउस में ठहराने का बंदोबस्त किया है। शनिवार को लोग रेस्ट हाउस में शिफ्ट होंगे।

शुक्रवार दोपहर राजधानी शिमला और मंडी में कुछ देर के लिए बादल झमाझम बरसे। चंबा के चुराह में नकरोड़-चांजू मार्ग पर पहाड़ी दरकने से कई पंचायतों का संपर्क कट गया है। लाहौल-स्पीति के कोकसर में लुंफू नाले के पास पहाड़ी से चट्टानें गिरने से 27 भेड़ों की मौत हो गई। प्रदेश में शनिवार को हल्की और रविवार से तीन दिन भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रदेश में मनाली-कोटली एनएच सहित 222 सड़कें, 36 बिजली ट्रांसफार्मर और 152 जल आपूर्ति योजनाएं अभी ठप हैं।


मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई भागों में 26, 30 व 31 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 27, 28 व 29 जुलाई को अधिकतर स्थानों पर बारिश होने के आसार हैं। 26 से 31 जुलाई तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 25 जुलाई तक 153 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 252 लोग घायल हुए हैं। 34 लोग अभी भी लापता हैं। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 1,588 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 1,139 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,376 पालतु पशुओं की मौत हो गई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 1436 करोड़ रुपये पहुंच गया है।