
औषधि नियंत्रण प्रशासन ने केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सहयोग से ओरल लिक्विड विशेषकर खांसी की दवा बनाने वाली कंपनियों में निरीक्षण शुरू किए हैं। इसके तहत हिमाचल प्रदेश में प्रोपलीन ग्लाइकॉलयुक्त ओरल लिक्विड के नमूने केवल निर्माण इकाइयों से ही नहीं, बल्कि रिटेलर्स, होलसेलर्स एवं अस्पतालों से भी एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्रकारों से बातचीत में ड्रग नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार औषधि निरीक्षकों को इसके लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जिन बच्चों की बुखार से मौत हुई है, उसमें हिमाचल की दवा कंपनियों का कोई संबंध नहीं है। मध्य प्रदेश के एफडीए ने हिमाचल ड्रग विभाग को जानकारी दी कि बद्दी की दवा कंपनी एक्कीनोवा फार्मास्युटिकल से बनी नेस्ट्रा डीएस खांसी की दवा के नमूने लिए गए।
एफडीए ने उपरोक्त दवा के विश्लेषण रिपोर्ट साझा की है, जिसमें इसे मानक गुणवत्ता का घोषित किया गया है। इस रिपोर्ट में डायथिलीन ग्लाइकॉल एवं एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा स्वीकृत मानकों के भीतर पाई गई है। हिमाचल की नेस्ट्रा डीएस के साथ साथ बंगलूरू, मथुरा व तमिलनाडु के कांचीपुरम की मैसर्स सेशान फार्मास्युटिकल की कोल्ड्रिफ सीरप के नमूने भी लिए गए थे। इसमें डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, जो एक विषैला पदार्थ है। डायथिलीन ग्लाइकॉल एक प्रदूषक है, जो गंभीर किडनी क्षति का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल ड्रग विभाग ने आदेश जारी कर मैसर्स सेशान फार्मास्युटिकल तमिलनाडु की ओर से निर्मित कोल्ड्रिफ सीरप की बिक्री, वितरण एवं उपयोग को हिमाचल प्रदेश राज्य में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोल्ड्रिफ का निर्माण हिमाचल प्रदेश में नहीं हुआ है।
