
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत अति निर्धन परिवारों के चयन की प्रक्रिया और मानदंड स्पष्ट कर दिए हैं। योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए सरकार लाभार्थियों का चयन दो चरणों में करेगी।
पहले समावेशन मानदंडों के आधार पर पात्र परिवारों का एक बड़ा पूल तैयार किया जाएगा। इसके बाद अपात्रता की चार कसौटियों पर अंतिम जांच होगी। यानी किसी परिवार का शुरुआती सूची में आ जाना ही योजना का अंतिम पात्र होना नहीं माना जाएगा।
₹75 हजार से ज्यादा आय तो बाहर
सरकार के अनुसार जिन परिवारों की वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक होगी, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा परिवार के पास एक हेक्टेयर से अधिक जमीन, कोई आयकरदाता सदस्य या सरकारी, अर्धसरकारी अथवा निजी नौकरी करने वाला सदस्य होने पर परिवार को अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा।
किन परिवारों को शुरुआती पात्रता मिलेगी?
योजना के प्रारंभिक पात्र पूल में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें:
- 27 वर्ष से कम उम्र के अनाथ बच्चों वाले परिवार।
- ऐसे परिवार जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं और 27 से 59 वर्ष का कोई वयस्क नहीं है।
- महिला मुखिया वाले परिवार, जिनमें 27 से 59 वर्ष का कोई वयस्क सदस्य नहीं है। इनमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल हैं।
- 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवार।
- ऐसे परिवार जिनके सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया हो।
- गंभीर बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम कमाने वाले सदस्य वाले परिवार।
- दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से स्थायी रूप से बिस्तर पर पड़े कमाने वाले सदस्य वाले परिवार।
पहले पात्र, फिर होगी अपात्रता की जांच
सरकार ने चयन प्रक्रिया को उदाहरण के जरिए भी समझाया है। अगर किसी परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, तो वह शुरुआती पात्र पूल में आएगा। लेकिन बाद की जांच में अगर परिवार की वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक पाई जाती है, तो उसे अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा।
वहीं अगर परिवार की आय 75 हजार रुपये या उससे कम है, जमीन एक हेक्टेयर या उससे कम है और परिवार में कोई आयकरदाता या नौकरी करने वाला सदस्य नहीं है, तो उसे अंतिम रूप से योजना के लिए पात्र माना जाएगा।
लापरवाही पर BDO और SDM पर कार्रवाई
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में स्पष्ट चेतावनी दी कि पात्र परिवारों के चयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी अपात्र व्यक्ति को सूची में शामिल किया गया या किसी पात्र परिवार को जानबूझकर बाहर रखा गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मंत्री ने बताया कि पात्र परिवारों के चयन के लिए समितियां गठित की गई हैं और जिलाधीशों को पात्र परिवारों की सूची की समीक्षा कर 30 अगस्त तक सरकार को पूरी सूची उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं भाजपा विधायक जीतराम कटवाल ने वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सूची में शामिल करने और सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पात्र परिवार औपचारिकताओं के कारण योजना से बाहर रह जा रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों के नाम सूची में शामिल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
अब सरकार की दोहरी जांच व्यवस्था के बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन परिवार वास्तव में अति निर्धन है और कौन अंतिम सूची से बाहर होगा।
