कुछ दिनों की राहत के बाद, हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, 18 से 23 जुलाई के बीच राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इस पूर्वानुमान को देखते हुए, विभिन्न दिनों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। 

गुरुवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहा, जिससे मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में उमस और गर्मी का प्रकोप देखा गया। ऊना में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो गर्मी की तीव्रता को दर्शाता है। इस दौरान, प्रदेश में शाम तक 50 सड़कें यातायात के लिए बंद रहीं, जबकि चार बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए, जिससे जनजीवन पर असर पड़ा।

हालिया बारिश के कारण चंबा जिले की पांगी घाटी के मौझी गांव में नाले में आए उफान से खेतों में खड़ी फसलें, एक पैदल पुल और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए। सूचना मिलते ही, प्रशासन और संबंधित विभागों की एक टीम नुकसान का आकलन करने के लिए मौके पर रवाना हुई। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण, अधिकारियों को गांव तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ा। इसी तरह, कुल्लू जिले में भी पूर्व की बारिश के कारण अब तक 28 सड़कें बंद हैं और उन्हें बहाल करने का कार्य जारी है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए विस्तृत अलर्ट जारी किया है:

  • 18 जुलाई: मंडी और कांगड़ा जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट।
  • 19 जुलाई: चंबा, शिमला, मंडी और कांगड़ा जिलों में ऑरेंज अलर्ट।
  • 20 जुलाई: चंबा, कुल्लू, शिमला, मंडी और कांगड़ा जिलों में ऑरेंज अलर्ट।
  • 21 से 23 जुलाई: मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

सुरक्षा के उपाय
मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और प्रशासन द्वारा जारी की गई सलाह का पालन करने की अपील की है। भारी बारिश के कारण भूस्खलन, मिट्टी धंसने और सड़कों के बंद होने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।