
हिमाचल विधानसभा में संस्थानों के मुद्दे पर गरमाया सदन
शिमला: हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को पहले ही सवाल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच करीब आधे घंटे तक तीखी नोकझोंक हुई। विभिन्न संस्थानों को बंद करने, विलय करने और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार के फैसले नीतिगत हैं, व्यक्तिगत नहीं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करवाना है। वहीं, जयराम ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने पर कांग्रेस सरकार के पांच साल के हर फैसले की समीक्षा की जाएगी।
विपक्ष ने मांगा तीन साल का पूरा ब्योरा
मंगलवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, विधायक रणधीर शर्मा और त्रिलोक जम्वाल ने संयुक्त सवाल के माध्यम से सरकार से पिछले तीन वर्षों में विभिन्न विभागों के संस्थानों को बंद, विलय या डिनोटिफाई करने और नए संस्थान खोलने का ब्योरा मांगा।
जवाब में मुख्यमंत्री सुक्खू ने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी लाभ लेने के लिए प्रदेशभर में संस्थान खोलने की घोषणाएं की गई थीं। कई जगह स्कूल, कॉलेज और स्वास्थ्य संस्थान तो खोल दिए गए, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ, भवन और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालने के बाद इन फैसलों की समीक्षा की और जरूरत के आधार पर संस्थानों को चलाने की नीति अपनाई।
2,035 संस्थान डिनोटिफाई, 362 नए खुले
मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि 31 जुलाई 2025 तक सरकार ने 2,035 संस्थानों को डिनोटिफाई किया, जबकि 362 नए संस्थान खोले गए। इसके अलावा 123 संस्थानों को दोबारा बहाल किया गया।
सुक्खू ने कहा कि सरकार भाजपा या कांग्रेस देखकर फैसले नहीं लेती, बल्कि जहां जनता की वास्तविक जरूरत होती है, वहीं संस्थान खोले जाते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई और संस्थानों को मंजूरी दी जाएगी।
जयराम ठाकुर ने सरकार पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि साढ़े तीन साल बाद इस सवाल का जवाब मिला है और वह भी अधूरा है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने 2,035 संस्थानों को डिनोटिफाई किया और बाद में 123 संस्थानों को फिर से बहाल करना पड़ा, तो इसका मतलब है कि उन्हें बंद करने का फैसला गलत था।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक बदले की भावना से फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर संस्थान खोले थे, लेकिन सत्ता बदलते ही उन्हें निशाना बनाया गया।
जयराम ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जब भाजपा दोबारा सत्ता में आएगी तो कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों के हर फैसले की समीक्षा की जाएगी।
रणधीर शर्मा ने भी सरकार को घेरा
विधायक रणधीर शर्मा ने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा सरकार के समय जलशक्ति विभाग का एक मंडल खोला गया था, जहां स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध थीं। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इसे बंद कर दिया, लेकिन तीन साल बाद उसी क्षेत्र के पास फिर नया मंडल खोल दिया गया।
उन्होंने कहा कि नया मंडल किराये के भवन में चल रहा है और यहां पहले की तुलना में स्टाफ भी कम है। रणधीर शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या तीन साल बाद अचानक वहां जरूरत पैदा हुई या फिर राजनीतिक लाभ के लिए फैसले लिए गए।
भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल में सरकार यह तक तय नहीं कर पाई कि प्रदेश में वास्तविक जरूरत कहां है। वहीं, विधायक हंसराज ने चंबा में बंद किए गए संस्थानों का मामला सदन में उठाया।
