
दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) जोनल अस्पताल शिमला में सुबह टीका लगने के बाद दोपहर बाद 45 दिन की बच्ची की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि टीका लगाने के बाद बच्ची की मौत हुई है। टीका लगने के तीन घंटे के भीतर बच्ची सुन्न हो गई थी। इसके बाद बच्ची ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद संजौली से मां बच्ची को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लेकर आई। यहां चिकित्सकों ने काफी देर तक बच्ची कियांशी की जांच की और सीपीआर दी लेकिन बाद में मृत घोषित कर दिया।
शाम को फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने बच्ची का पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक जांच में बच्ची की टीके के प्रभाव से मौत की बात सामने नहीं आई है। फिर भी गहनता से जांच के बाद ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार होगी। वहीं परिजनों की ओर से पुलिस में शिकायत दी गई है। पोस्टमार्टम के दौरान बिसरा भी जांच के लिए लिया है। इसे एफएसएल जुन्गा भेजा जाएगा। इसके बाद ही मौत के असल कारणों का पता लग सकेगा।
गौरतलब है कि 45 दिन के बाद मासूमों को पेंटावेलेंट, इंजेक्टेबल पोलियो और न्यूमोकोकल वैक्सीन लगाई जाती है। इसके अलावा रोटा वायरस और पोलियो की ड्रॉप्स पिलाई जाती है। दूसरी तरफ बच्ची के दादा दिनेश कुमार ने बताया कि सुबह 11:00 बजे माता-पिता बच्ची को छह सप्ताह बाद लगने वाले टीका लगाने के लिए दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल गए थे। टीका (इंजेक्शन) लगाने के बाद बच्ची को आधा घंटा तक चिकित्सकों ने देखरेख में रखा। इसके बाद ही बच्ची को जाने दिया। माता-पिता बच्ची को लेकर अपने घर संजौली आ गए।
करीब 2:00 बजे बच्ची ने प्रतिक्रिया देनी बंद कर दी। थोड़ी ही देर बाद बच्ची के नाक से खून आ गया। मां तुरंत बच्ची को आईजीएमसी लेकर आई। इसके बाद चिकित्सकों ने जांच की लेकिन बच्ची की तब तक मौत हो चुकी थी। बच्ची का शरीर नीला पड़ चुका था। अब जांच के बाद बच्ची की मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा।
पलभर में गम में बदल गईं सारी खुशियां
घर के कोने-कोने को 45 दिन में खुशियों से सराबोर करने वाली कियांशी की बुधवार को मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां क्षितिजा के मुख पर केवल एक ही बात थी कि बच्ची ने इतने दिन में किसी को तंग नहीं किया। मां ने कहा कि 45 दिन में बच्ची के साथ जीवन बेहतर था। पोस्टमार्टम के दौरान फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के बाहर माहौल गमगीन रहा। बुधवार को भी परिजन ने हंसते-खेलते बच्ची को टीकाकरण के लिए लाए थे। दोपहर बाद परिवार बच्ची ने दम तोड़ दिया। बच्ची के मौत का जैसे ही पता लगा मां-पिता रो-रो कर बेहाल हो गए। वहां बच्ची के पिता दलीप, मां क्षितिजा और दादा दिनेश कुमार तथा रिश्तेदार मौके मौजूद थे और हर किसी की आंख नम थी। 45 दिन पहले कियांशी की किलकारियों से पूरा घर खुशियों से सराबोर हो गया था।
डीडीयू में 24 अन्य बच्चों का भी हुआ टीकाकरण, सभी हैं स्वस्थ
दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल में बुधवार को 25 बच्चों का टीकाकरण हुआ। जैसे ही बच्ची की मौत का जिला स्वास्थ्य विभाग को पता चला तो सभी हैरान हो गए। इसके बाद अन्य 24 बच्चों की भी जानकारी ली गई। राहत की बात यह है कि 24 बच्चे पूरी तरह से ठीक हैं। इसके बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की चिंता कम हुई। हालांकि विभाग की ओर से टीम को वीरवार को भी स्वास्थ्य का फॉलोअप लेने के लिए कहा है। इसके लिए बाकायदा निर्देश भी टीम को दिए हैं। साथ ही बच्चों की घरद्वार पर जाकर भी जांच की जाएगी। इसके लिए आशा वर्कर को बुधवार को हुए टीकाकरण की लिस्ट दे दी है। बच्ची की मौत के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरी तरह से अलर्ट है।
चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को टीकाकरण के बाद देखरेख में रखा था। आधे घंटे तक देखरेख के बाद जांच की जाती है। इसके बाद ही बच्चे को घर जाने दिया जाता है। बच्ची की मौत के बाद चिकित्सक और स्टाफ भी काफी चिंता में है। वहीं स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर वीरवार को जांच करेगा। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा कि पोस्टमार्टम की प्रारंभिक जांच में बच्ची की वैक्सीन के प्रभाव से मौत की बात सामने नहीं आई है। विस्तृत जांच के बाद ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एफएसएल की रिपोर्ट के अनुसार ही रिपोर्ट के असल कारणों का पता लग सकेगा। एएसपी अभिषेक ने बताया कि परिजनों की ओर से शिकायत मिली है। मामले में कार्रवाई की जाएगी।
