
हिमाचल प्रदेश के बागवानों को इन दिनों अपने बगीचों में दवाओं के छिड़काव के बाद पत्तियां और फूल झड़ने की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र शिमला को भी बागवान इस तरह की समस्याओं से अवगत करवा रहे हैं। इस सीजन में कई सेब उत्पादकों से शिकायतें मिल रही हैं कि पिंक बड, फ्लावरिंग और फ्रूट सेट चरण में समस्या पेश आ रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि एक साथ 3 से 5 रसायनों का मिश्रण करने से फसल में फाइटोटॉक्सिसिटी (दवाओं के गलत मिश्रण से पौधों पर दुष्प्रभाव) की समस्या बढ़ रही है। इसके कारण पत्तियां जल रही हैं, फूल झड़ रहे हैं और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र शिमला ने बागवानों को सलाह दी है कि एक स्प्रे टैंक में अधिकतम दो ही रसायन मिलाएं। पोषक तत्व, वृद्धि नियामक, कीटनाशक, फफूंदनाशक को एक साथ मिलाकर छिड़काव करना गंभीर गलती है। विशेष रूप से फूल आने के समय किसी भी प्रकार के कीटनाशक या फफूंदनाशक का उपयोग न करने की हिदायत दी गई है, ताकि मधुमक्खियों और परागण प्रक्रिया को सुरक्षित रखा जा सके। बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार का कहना है कि बागवानों को बागवानी विभाग और बागवानी विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक स्प्रे शेड्यूल का दवाओं की अनुशंसित मात्रा में ही प्रयोग करने की हिदायत दी गई है।
स्प्रे से पहले जार टेस्ट और सही समय का रखें ध्यान
विशेषज्ञों ने स्प्रे से पहले जार टेस्ट करना अनिवार्य बताया है। यदि मिश्रण गाढ़ा, तैलीय या रंग बदलने लगे तो उसे खेत में उपयोग न करें। इसके अलावा, स्प्रे सुबह 10 बजे से पहले या शाम 4 बजे के बाद ही करें। तेज धूप, हवा या बारिश के दौरान छिड़काव से बचने और अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
