हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं। मंगलवार को पहले चरण में प्रदेश की 1293 पंचायतों के लिए वोट डाले जाएंगे। पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य के अलावा जिला परिषद व पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्य के करीब 7200 प्रत्याशियों लिए करीब 16 लाख मतदाता वोट डालेंगे। प्रदेश में मतदान के लिए 16,539 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें 3554 संवेदनशील और 1585 अतिसंवेदनशील बूथ होंगे। सुबह सात से दोपहर तीन बजे तक वोट डाले जाएंगे। मतदान कराने के लिए 8,198 कर्मचारियों की तैनाती गई है। प्रधान, उपप्रधान व वार्ड सदस्य के नतीजे मतदान के बाद शाम तक आ जाएंगे जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए पड़े मतों की गिनती 31 मई को होगी। मतदान बैलेट पेपर से होगा। हिमाचल प्रदेश में दूसरे चरण में 28 मई को 1274 और 30 मई को तीसरे एवं आखिरी चरण में 1187 पंचायतों के लिए वोट डाले जाएंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में मतगणना होगी। आयोग मतदान केंद्रों की ऑनलाइन निगरानी करेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्र के भीतर केवल वही व्यक्ति प्रवेश कर सकेगा, जिसे आयोग की ओर से अधिकृत किया गया होगा। बिना अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति को मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आयोग ने प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी के बाहर ही प्रत्याशियों के शिविर स्थापित किए जा सकेंगे। मतदान केंद्र के आसपास भीड़ एकत्र करने या प्रचार पर रोक रहेगी। अधिकारियों को आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के पहले चरण के चुनाव में आयोग नया रिकार्ड बनाने को तैयार है। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं का उत्साह पिछले चुनावों की तुलना में अधिक दिखाई दे रहा है। आयोग को उम्मीद है कि वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में बने 78.70 प्रतिशत मतदान के रिकॉर्ड को इस बार पार किया जा सकता है। तीनों चरणों में 52 हजार 349 नए मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव के पहले चरण में 1227 पंचायतों में मतदान हुआ था। उस दौरान ग्रामीण मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई थी और प्रदेश में कुल 78.70 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। इस बार पहले चरण में 1293 पंचायतों में चुनाव हो रहे हैं, जिसके चलते मतदान का दायरा भी बढ़ गया है।

 निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों से प्राप्त तैयारियों की रिपोर्ट के आधार पर बेहतर मतदान की संभावना जताई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने लोगों से लोकतंत्र के इस पर्व में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। इसके अलावा कई पंचायतों में आयोग की ओर से मतदान करने के पोस्टर भी दिखाई देंगे। आयोग का कहना है कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और गांव के विकास, सड़क, पानी, स्वास्थ्य तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्णय पंचायत स्तर पर ही लिए जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक मतदाता की भागीदारी जरूरी है।

इस बार चुनाव में युवा मतदाताओं का उत्साह भी खास तौर पर देखने को मिल रहा है। आयोग के अनुसार तीन चरणों में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले 52 हजार 349 नए मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को लेकर चुनावी माहौल में अलग उत्साह बना हुआ है। कई क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से नए मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मतदान केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के साथ-साथ पेयजल, बैठने की व्यवस्था की है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने कहा कि चुनाव की तैयारियां पूरी है। उन्होंने लोगों से घर से बाहर निकलकर मतदान करने की अपील की है।

पंचायत चुनावों के दौरान मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए इस बार मतदान केंद्रों पर वोटिंग तीन चरणों में पूरी करवाई जाएगी। वार्ड पंच, प्रधान, उपप्रधान, बीडीसी और जिला परिषद सदस्य के लिए अलग-अलग मतपत्र दिए जाएंगे, जबकि प्रत्येक मतदान केंद्र पर तीन पोलिंग अधिकारियों की ड्यूटी तय की गई है। चुनाव प्रक्रिया के तहत पहला पोलिंग अधिकारी मतदाता सूची इंचार्ज की भूमिका निभाएगा। उसकी जिम्मेदारी मतदाता की पहचान और नाम सत्यापन से लेकर उंगली पर स्याही लगाने तक रहेगी। वह मतदाता सूची में नाम और पता जांचेगा तथा मतदाता का नाम और सीरियल नंबर ऊंची आवाज में पढ़ेगा, ताकि मौजूद पोलिंग एजेंट यदि कोई आपत्ति हो तो तुरंत दर्ज कर सकें। पुरुष और महिला मतदाताओं की अलग-अलग गिनती का रिकॉर्ड भी पहले पोलिंग अधिकारी के पास रहेगा।

इसके बाद मतदाता दूसरे पोलिंग अधिकारी के पास जाएगा, जो मतपत्र इंचार्ज की भूमिका निभाएगा। दूसरा पोलिंग अधिकारी बैलेट पेपर का सीरियल नंबर दर्ज करेगा और मतदाता को वार्ड पंच, उपप्रधान और प्रधान पद के मतपत्र जारी करेगा। मतदाता पोलिंग बूथ के भीतर बनाए गए विशेष कवरयुक्त मतदान कक्ष में जाकर मतपत्रों पर मुहर लगाएगा और उन्हें पुनः फोल्ड करेगा। इसके बाद मतदाता बाहर आकर संबंधित मतपेटियों में मतपत्र डालेगा। इस दौरान दूसरा पोलिंग अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि सही रंग का मतपत्र सही मतपेटी में ही डाला जाए।

वार्ड पंच, उपप्रधान और प्रधान पद के मतपत्र डालने के बाद मतदाता तीसरे पोलिंग अधिकारी के पास पहुंचेगा। तीसरा पोलिंग अधिकारी बीडीसी और जिला परिषद सदस्य पद के लिए मतपत्र जारी करेगा। मतदाता दोबारा मतदान कक्ष में जाकर इन मतपत्रों पर मुहर लगाएगा और फिर संबंधित मतपेटियों में मतपत्र डालेगा। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, बहुस्तरीय पंचायत चुनावों में भ्रम और गड़बड़ी से बचने के लिए यह चरणबद्ध प्रक्रिया लागू की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

हर श्रेणी के लिए अलग रंग का होगा मतपत्र

पंचायत चुनाव में हर पद के लिए अलग रंग का मतपत्र होगा। पंचायत सदस्य के लिए सफेद, उप प्रधान के लिए पीला, प्रधान के लिए हल्का हरा, पंचायत समिति सदस्य के लिए गुलाबी और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का नीला मतपत्र होगा। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि बैलेट पेपर पर मुहर स्पष्ट और सही स्थान पर लगाएं।

पंचायतीराज संस्थाओं के 31,182 पदों पर तीन चरणों में होगा चुनाव

हिमाचल पंचायतीराज संस्थाओं के 3754 पंचायतों में 31,182 पदों के लिए तीन चरणों में चुनाव होगा। 85 पंचायत समिति सदस्य, प्रधान 176, उपप्रधान 286, सदस्य 10307 निर्विरोध चुने गए हैं। प्रदेश में 131 ऐसी पंचायतें है। जो पूरी के पूरी निर्विरोध चुनी गई है। कुल मिलाकर 10,854 लोग निर्विरोध भी चुने गए हैं।

जाली वोट डाला तो होगी एफआईआर

राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि है आज से पहले चरण का मतदान हो रहा है। ऐसे में मतदान केंद्रों के प्रवेश द्वार पर किसी भी प्रत्याशी को पोस्टर मान्य नहीं होंगे। प्रचार थमने के बाद लाउड स्पीकर का इस्तेमाल मान्य नहीं है। प्रत्याशी अपने वाहन में मतदाताओं को केंद्र तक नहीं ले जा सकेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि गलत नाम बताकर अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के नाम पर वोट डालता है तो ऐसी स्थिति में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी।

मतदान के लिए कोई एक पहचान पत्र अनिवार्य

मतदान के लिए वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आयकर पहचान पत्र, निजी औद्योगिक संस्थान से जारी पहचान पत्र, बैंक की पासबुक, राशनकार्ड, छात्र पहचान पत्र, शस्त्र लाइसेंस, पेंशन पासबुक, रेलवे या बस पास, अक्षम प्रमाण पत्र, स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड आदि में से कोई एक पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।
 

मतदान केंद्र से 100 मीटर के दूरी में रहेंगे लोग

मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में वहीं व्यक्ति भीतर प्रवेश कर सकेगा जिनका वोट होगा। वोट देने के बाद लोग 100 मीटर के बाहर खड़े रह सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मतदान केंद्र के समीप भीड़ नहीं जुटेगी। जिस मतदाता का वोट जिस केंद्र में होगा, वही जा सकेगा।