शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। प्रदेश में एड्स नियंत्रण संस्थाओं के तहत कार्यरत 414 कर्मचारियों को नियमित करने का सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं आशा वर्करों के लिए भी भविष्य में कोई स्थायी नीति बनाने का प्रावधान नहीं है।


शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने सोमवार को यह जानकारी दी।
414 एड्स नियंत्रण कर्मियों का नहीं होगा नियमितीकरण
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में एड्स नियंत्रण के लिए 18 गैर सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं। इन संस्थाओं के तहत कुल 414 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।


ये सभी कर्मचारी संबंधित गैर सरकारी संस्थाओं के अधीन साल-दर-साल के अनुबंध समझौते के आधार पर काम कर रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने का न तो कोई प्रस्ताव है और न ही फिलहाल ऐसा कोई विचार किया जा रहा है।


आशा वर्करों के लिए भी स्थायी नीति नहीं
वहीं नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने आशा वर्करों को लेकर भी सरकार की स्थिति स्पष्ट की।
मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कार्यरत आशा वर्करों के नियमितीकरण के लिए भविष्य में कोई नीति बनाने का विचार नहीं है। इसके अलावा उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के रिक्त पदों पर मर्ज या समायोजित करने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है।


प्रोत्साहन राशि के आधार पर करती हैं काम
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार आशा वर्कर प्रोत्साहन राशि आधारित कार्यकर्ता हैं। वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत केंद्र सरकार के मानदंडों और एनएचएम के दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी सेवाएं देती हैं।


उन्हें प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि के साथ-साथ राज्य सरकार की ओर से मानदेय भी दिया जाता है।
विभाग में अलग कैडर भी नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था में आशा वर्करों के लिए स्थायी नीति का कोई प्रावधान नहीं है।


स्वास्थ्य विभाग में उनकी योग्यता के अनुरूप ऐसा कोई अलग कैडर भी मौजूद नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें विभाग के रिक्त पदों पर समायोजित या मर्ज किया जा सके।
विधानसभा में सरकार के इस जवाब से एड्स नियंत्रण संस्थाओं में काम कर रहे 414 कर्मचारियों और प्रदेश की आशा वर्करों के नियमितीकरण की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।