हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर चर्चाओं के बीच पालमपुर को जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, अभी पालमपुर को नया जिला बनाने को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

पहले भी शुरू हुई थी जिला बनाने की कवायद

पालमपुर को जिला बनाने की मांग काफी पुरानी है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल के दौरान इस दिशा में पहल भी हुई थी। उस समय पालमपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) का कार्यालय खोला गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से जिला बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में एएसपी कार्यालय भी बंद कर दिया गया।

इसके बाद पालमपुर जिला बनाओ संघर्ष समिति ने इस मांग को उठाया, लेकिन समय के साथ आंदोलन कमजोर पड़ गया। अब जिला पुनर्गठन आयोग के गठन से एक बार फिर क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

धर्मशाला की दूरी बनी बड़ा आधार

पालमपुर को जिला बनाने के पक्ष में सबसे प्रमुख तर्क प्रशासनिक सुविधा और जिला मुख्यालय धर्मशाला की दूरी है। पालमपुर में एसडीएम कार्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, सैनिक स्कूल, बड़े शिक्षण संस्थान और अस्पताल जैसी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद आसपास के कई दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है।

छोटा भंगाल, चढियार और आलमपुर सहित कई क्षेत्रों से धर्मशाला की दूरी लगभग 80 से 100 किलोमीटर तक बताई जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पालमपुर जिला बनने से बैजनाथ, पालमपुर, सुलह और जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक कामकाज में राहत मिल सकती है।

विधायक आशीष बुटेल की भी बढ़ सकती है भूमिका

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल की ओर से भी क्षेत्र को जिला बनाने की बात कही गई थी। अब आयोग के गठन के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि सरकार पालमपुर को जिला बनाने का फैसला करती है, तो इसका क्षेत्र की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

जिला बनाने की मांग पर क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष जगमेल कटोच का कहना है कि पालमपुर को जिला बनाने की पहल पहले भी हुई थी, लेकिन जनता की मांग पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने प्रशासनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पालमपुर को जिला बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

वहीं, नगर निगम पालमपुर की महापौर राधा सूद के अनुसार, विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक आशीष बुटेल ने भी इस मांग को उठाया था। जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद अब इस मांग पर सकारात्मक निर्णय होने की उम्मीद जगी है।

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पूर्व कुलपति प्रो. अशोक सरियाल का कहना है कि पालमपुर को जिला बनाने के लिए राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ विभिन्न संस्थाओं, संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों को भी तथ्य आधारित प्रयास करने चाहिए। उन्होंने आयोग के सामने ठोस तथ्य रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अब आयोग की सिफारिशों पर टिकी निगाहें

पालमपुर को जिला बनाने की मांग के पीछे प्रशासनिक सुविधा, धर्मशाला से दूरी और क्षेत्र के विकास जैसे प्रमुख तर्क दिए जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर टिकी हैं। आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा कि पालमपुर की वर्षों पुरानी मांग पूरी होती है या लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।