
खुंब निदेशालय सोलन के वैज्ञानिकों ने इसके क्लाइमेट और बीज को लेकर शोध कार्य शुरू कर दिया है। अभी तक गुच्छी केवल सर्दियों में देवदार और कायल के जंगलों में 6,500 फीट से अधिक ऊंचाई पर प्राकृतिक रूप से मिलती है। खुब निदेशालय सोलन में दो दिवसीय राष्ट्रीय मशरूम सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्रीनहाउस में गुच्छी उगाने में पहले ही सफलता मिल चुकी थी, अब इसे हर मौसम में उत्पादन योग्य बनाने की दिशा में काम हो रहा है। वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि जैसे बटन मशरूम पूरे वर्ष उगाई जाती है, वैसे ही अब गुच्छी को भी व्यावसायिक स्तर पर उगाया जा सकेगा। डॉ. अनिल ने बताया कि जल्द ही इसका बीज तैयार कर लिया जाएगा।
प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी करीब 25 से 30 हजार रुपये प्रति किलो बिकती है। गुच्छी का निर्यात भी किया जाता है। खुंब निदेशालय के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों ने गुच्छी को ग्रीन हाउस में उगाने पर सफल शोध किया है। अब बीज और आकार पर शोध किया जा रहा है। बीज तैयार होने पर इसे हर मौसम में उगाया जा सकेगा। प्राकृतिक और ग्रीन हाउस में उगाई गुच्छी की गुणवत्ता एक समान है। सम्मेलन में गुच्छी पर एक प्रेजेंटेशन भी दी गई, जिसमें अभी तक इसमें मिली सफलता पर वैज्ञानिकों ने अपने शोध साझा किए।
वैज्ञानिकों के अनुसार गुच्छी में विटामिन डी, सी, आयरन, कॉपर, जिंक और फास्फोरस अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से गठिया, थायराइड, हड्डी रोग, मानसिक तनाव को खत्म करने में मदद मिलती है। वहीं दिल के रोग दूर करने और शरीर की चोट को भी जल्द भरने में यह लाभकारी है। गुणों से भरपूर होने के कारण ही गुच्छी अभी विदेशों में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। नामी होटलों में भी यह विशेष ऑर्डर पर तैयार की जाती है।
