प्रदेश सरकार व विभाग शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन सुविधाओं के दावे करते हैं। लेकिन शहर से मात्र 5 किलोमीटर दूर प्राथमिक पाठशाला भुंगरनी उन सभी दावों की हवा निकाल रही है। यहां पर पिछले 13 वर्षों से स्कूल के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है।

पहले भाजपा व अब कांग्रेस सरकार में इस स्कूल की एकमात्र छोटे से कमरे में पांच कक्षाएं, कार्यालय व मध्याहन भोजन की रसोई संचालित हो रही हैं। एकमात्र उम्मीद खाद्य एवं आपूर्ति निगम से दस बिस्वा भूमि मिलने की थी लेकिन, निगम ने असमर्थता जता दी है। अब, स्कूल बंद होने या स्थानांतरित होने की बाट जोह रहा है।

बता दें कि वर्ष 2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा भुंगरनी में प्राथमिक पाठशाला खोली गई। स्थानीय समाजसेवी गुरमीत सिंह मन्नी द्वारा पांच वर्षों तक पाठशाला के लिए नि:शुल्क कमरा, बिजली पानी उपलब्ध करवाया गया। गुरमीत सिंह ने बताया कि तब स्कूल में 35 से 45 के बीच बच्चों की संख्या रही। उसके बाद पिछले सात वर्षों से द भुंगरनी सीएमपी सोसायटी द्वारा बिना किराये के एक कमरा मुहैया करवाया गया। इतने वर्षों से 17 बाय 10 साइज के एकमात्र कमरे में 5 कक्षाएं, कार्यालय व मध्याह्न भोजन भी बन रहा है। स्कूल में करीब 22 बच्चों की संख्या तथा दो शिक्षक, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी व कैशियस कार्यरत है।

पिछले वर्ष सोसायटी द्वारा कमरे को खाली करने का नोटिस भी जारी किया गया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन काफी परेशानी में रहा। फिर पंचायत में स्थित हिमाचल प्रदेश खाद्य एंव आपूर्ति निगम की करीब साढ़े नौ बीघा भूमि में से कुछ स्कूल भवन को मांगी गई।

भुंगरनी प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी बलबीर सिंह चौहान ने कहा कि निगम की तरफ से जवाब आ गया है। जवाब में स्कूल भवन योजना को भूमि उपलब्ध करवाने में असमर्थता जताई गई है।

स्थानीय सहकारी सोसायटी के सचिव चरनजीत सिंह कहना है कि सात वर्ष पहले स्कूल संचालक को मात्र तीन माह के लिए एक कमरा दिया था। अब, इस स्थल पर सोसायटी ने डिपो व कार्यालय शुरु करना है। स्कूल के लिए गांव में भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई। पिछले वर्ष ही स्कूल प्रबंधन को अन्य जगह स्थानांतरित कर कमरा खाली करने को नोटिस भेजा गया है।


स्थानीय निवासी समाजसेवी गुरमीत सिंह ने बताया कि भुंगरनी स्कूल भवन के लिए कुछ वर्ष पहले 6.30 लाख रुपये बजट प्रावधान भी हुआ है। लेकिन, पंचायत में स्कूल के लिए कोई भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अब, अंंतिम उम्मीद सिविल सप्लाई विभाग से भी हताशा ही हाथ लगी है।