शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं और सेवाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नया कदम उठाया गया है। अब प्रदेश में 72 ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और योजनाओं को आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली से जोड़ा जाएगा।


प्रदेश के नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को हिम एक्सेस और हिम परिवार पोर्टल पर पंजीकरण और लॉगिन के दौरान आधार आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा मिलेगी।


सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से फर्जी पहचान और डुप्लीकेट पंजीकरण पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाना भी आसान हो सकेगा।


आधार से कैसे बदलेगी व्यवस्था?
डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, दोनों प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधार प्रमाणीकरण लागू करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद व्यवस्था लागू की गई है।


विभागीय अधिकारियों के अनुसार आधार आधारित सत्यापन से उपयोगकर्ताओं की पहचान अधिक सटीक तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाने और विभिन्न योजनाओं में अपात्र या फर्जी लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।


आधार प्रमाणीकरण स्वैच्छिक रहेगा
सरकार के अनुसार आधार प्रमाणीकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। इसका इस्तेमाल केवल पहचान सत्यापन और सरकारी सेवाओं के प्रभावी वितरण के उद्देश्य से किया जाएगा।
जिन नागरिकों के पास आधार संख्या है, वे इसके माध्यम से अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे।


बार-बार दस्तावेज जमा कराने से मिलेगी राहत
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार पहचान संबंधी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से पहचान डिजिटल रूप से सत्यापित होने से सेवा वितरण की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।


अब देखना होगा कि 72 सेवाओं में यह व्यवस्था किस तरह लागू होती है और आम नागरिकों के लिए डिजिटल सरकारी सेवाओं का अनुभव कितना आसान बनता है।