
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाते हुए 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले लोगों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन 1,700 से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया है। इससे प्रदेश के करीब 7,000 दिव्यांगजन लाभान्वित होंगे। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल ने ब्लाइंड पर्सन्स एसोसिएशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में यह घोषणा की। मंत्री शांडिल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण और उनके सम्मानजनक जीवन के लिए प्रयास कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। डॉ. शांडिल ने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित लगभग 311 पद रिक्त हैं। इनमें से 174 पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। भर्ती प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग में 41 पद, पशुपालन विभाग में 13, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 4 और शेष पद अन्य विभागों में हैं। सरकार इन पदों को शीघ्र भरने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर रही है ताकि योग्य दिव्यांग युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांगजनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार विचार करेगी। इनमें हिम बस कार्ड से हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा, दृष्टिबाधित कर्मचारियों के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र राज्य आयुक्त की नियुक्ति, सहारा पेंशन योजना से जुड़े विषय व विशेष विद्यालयों की व्यवस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मंडी जिले के सुंदरनगर और शिमला जिले के ढली में संचालित विशेष विद्यालयों से संबंधित मांगों को भी गंभीरता से लिया जाएगा। बता दें कि दृष्टिबाधित संघ के सदस्य पिछले 980 दिनों से अपनी मांगों के लिए धरना प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
