शिमला/हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की द ताल को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विस सोसायटी में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एफडीआर से जुड़े रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ी के मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।


विजिलेंस जांच में सोसायटी के रिकॉर्ड और संबंधित बैंकों के अभिलेखों में बड़ा अंतर पाया गया है। आरोप है कि जाली एफडीआर और अन्य दस्तावेज तैयार कर उन पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए और बाद में उन्हें वास्तविक दस्तावेजों के रूप में इस्तेमाल किया गया।


इन छह लोगों को बनाया आरोपी
मामले में अजय पाल, अशोक शर्मा, यौवनलता, सुनील कुमार, रमेश शर्मा और सुरेश परमार को आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों में सोसायटी के तत्कालीन सचिव के अलावा सहकारिता विभाग और अंकेक्षण व्यवस्था से जुड़े अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं।


आरोप है कि संबंधित अंकेक्षण अधिकारियों ने सोसायटी के अभिलेखों का बैंक रिकॉर्ड से आवश्यक भौतिक सत्यापन नहीं किया और कथित रूप से जाली दस्तावेजों के आधार पर अंकेक्षण रिपोर्ट तैयार की।


5.17 करोड़ की एफडीआर, बैंक रिकॉर्ड में मिली सिर्फ 2.71 करोड़
विजिलेंस की जांच वर्ष 2011-12 से 2023-24 तक सोसायटी में जमा राशि और एफडीआर से जुड़े रिकॉर्ड पर केंद्रित रही।
जांच में सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज एफडीआर की संख्या और राशि का बैंकों के वास्तविक रिकॉर्ड से मिलान किया गया। वर्ष 2023-24 में सोसायटी के रिकॉर्ड में 5,17,62,690 रुपये की एफडीआर दर्ज थी।


लेकिन बैंक रिकॉर्ड में केवल 2,71,07,020 रुपये की एफडीआर का मिलान हुआ।
इस तरह दोनों रिकॉर्ड के बीच 2,46,55,670 रुपये का अंतर सामने आया, जिसे जांच रिपोर्ट में कथित गबन या दुरुपयोग से जुड़ा बताया गया है।
रोकड़वही की जांच में भी सामने आया बड़ा अंतर
जांच के दौरान रोकड़वही में नकद शेष और अमानत वापसी से संबंधित प्रविष्टियों की भी जांच की गई।


रिपोर्ट के अनुसार उचित रिकॉर्ड नहीं मिलने पर 72,35,768 रुपये की अतिरिक्त राशि सचिव से प्राप्तव्य पाई गई। इस राशि पर 24,65,567 रुपये ब्याज देय होने का भी उल्लेख किया गया है।
जांच रिपोर्ट में सोसायटी को कुल 2,32,52,311 रुपये की शुद्ध वित्तीय हानि होने की बात कही गई है।
बैंक की जाली मोहर और फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
विजिलेंस के अनुसार एफडीआर प्रमाण-पत्रों पर लगी बैंक शाखा की मोहर और हस्ताक्षर वास्तविक बैंक अभिलेखों से मेल नहीं खाते पाए गए।


आरोप है कि बैंक की जाली मोहर तैयार कर जाली एफडीआर और अन्य दस्तावेज बनाए गए, जिन्हें वास्तविक दस्तावेजों के रूप में इस्तेमाल किया गया।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
विजिलेंस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है।
इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत भी केस दर्ज किया गया है।
विजिलेंस अब मामले में दर्ज आरोपों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है। जांच के आगे बढ़ने के साथ इस कथित करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।