
करीब 500 करोड़ रुपये के बहुचर्चित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में तीन आरोपियों मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को 12 दिन की कस्टडी मिलने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले में अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उनकी कुर्की और पूरी मनी ट्रेल को स्थापित करने में जुट गया है। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा तक पहुंचने, विदेशों में मौजूद डिजिटल सर्वरों और क्रिप्टो वॉलेट की कड़ियां जोड़ने तथा निवेशकों के धन की वास्तविक रिकवरी सुनिश्चित करना है।
ईडी अब इन संपत्तियों की कर रही पहचान
पीएमएलए के तहत गठित विशेष अदालत की अनुमति से ईडी अब उन सभी संपत्तियों की पहचान कर रही है, जिन्हें जांच में अपराध की कमाई से खरीदा जाना पाया गया है। जांच के दायरे में जुनेजा स्क्वायर में कथित बेनिफीशियल हिस्सेदारी, आरोपियों के बैंक खाते, रियल एस्टेट निवेश, क्रिप्टो वॉलेट और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियां शामिल हैं। ईडी सूत्रों के अनुसार पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा-5 के तहत इन संपत्तियों की अनंतिम कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने से पहले आरोपियों द्वारा संपत्तियां बेचने, स्थानांतरित करने या छिपाने की संभावना समाप्त हो जाए।
विशेष पीएमएलए अदालत से मिली 12 दिन की कस्टडी के दौरान ईडी की साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक टीमें आरोपियों से क्रिप्टो वॉलेट की प्राइवेट-की, विदेशी सर्वरों के एक्सेस लॉग, आईपी एड्रेस, डोमेन संचालन, क्लाउड डेटा और टेलीग्राम-व्हाट्सएप चैट्स से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाएंगी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि निवेशकों का पैसा किस-किस माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया, किन वॉलेट में स्थानांतरित हुआ और बाद में किन देशों अथवा प्लेटफॉर्म्स के जरिए उसकी लेयरिंग और इंटीग्रेशन किया गया। इसी कड़ी में फरार मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े संभावित लिंक भी जांच के दायरे में हैं।
ईडी की जांच का अंतिम उद्देश्य केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध से अर्जित पूरी संपत्ति का पता लगाकर उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त करना और अदालत के समक्ष ठोस मनी ट्रेल पेश करना भी है। फॉरेंसिक जांच में अब तक 2.48 लाख से अधिक निवेशकों के इस नेटवर्क से प्रभावित होने और करीब 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसी अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और रियल एस्टेट निवेशों को जोड़कर यह स्थापित करने का प्रयास करेगी कि अपराध से अर्जित धन कहां-कहां लगाया गया। जांच पूरी होने के बाद ईडी विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल करेगी। यदि अदालत कुर्की की पुष्टि करती है, तो जब्त संपत्तियां आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेंगी और कानून के अनुसार निवेशकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
