
बिलासपुर, 31 अगस्त 2026। हिमाचल प्रदेश समेत देशभर के 370 से अधिक संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत करने की तैयारी है। भाखड़ा बांध, कोल डैम और नाथपा झाकड़ी जैसे महत्वपूर्ण जलविद्युत प्रोजेक्ट भी इस सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में हैं। इन प्रतिष्ठानों को संभावित ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच समझौता हुआ है।
समझौते के तहत ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी संदिग्ध ड्रोन की समय रहते पहचान की जा सके और संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
हिमाचल के ये बड़े प्रोजेक्ट भी सुरक्षा घेरे में
हिमाचल में एशिया के सबसे बड़े भूमिगत जलविद्युत प्रोजेक्ट नाथपा झाकड़ी के अलावा भाखड़ा बांध और कोल डैम जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के पास है। इन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित दुरुपयोग को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के लिए संदिग्ध ड्रोन की पहचान और उनसे निपटना महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए सीआईएसएफ ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में ड्रोन तकनीक को शामिल किया है।
3 हजार से ज्यादा जवानों को मिल चुकी ट्रेनिंग
सीआईएसएफ के अनुसार अब तक 3,000 से अधिक कर्मियों को ड्रोन संचालन और ड्रोन रोधी सुरक्षा प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं करीब 80 सीआईएसएफ इकाइयां निगरानी, संभावित खतरों की पहचान और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं।
इसके अलावा ड्रोन से जुड़े खतरों और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी गठित की गई है।
राजस्थान में बनेगा ड्रोन और एंटी-ड्रोन उत्कृष्टता केंद्र
सीआईएसएफ और डीएफआई के बीच हुए समझौते के तहत राजस्थान के बहरोड़ स्थित सीआईएसएफ रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर को ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन प्रणालियों के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह पहल गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। डीएफआई भारतीय ड्रोन कंपनियों और तकनीकी उद्यमों के साथ मिलकर सीआईएसएफ की तकनीकी क्षमता, व्यावहारिक अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में सहयोग करेगा।
वास्तविक खतरे जैसी परिस्थितियों में होगी तैयारी
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के अनुसार बहरोड़ स्थित केंद्र को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करना एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे वास्तविक परिस्थितियों में सामने आने वाले ड्रोन खतरों के खिलाफ बल की तैयारियों का परीक्षण किया जा सकेगा।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था और जवाबी कार्रवाई में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर भी काम किया जाएगा।
यानी आने वाले समय में भाखड़ा बांध से लेकर कोल डैम और नाथपा झाकड़ी जैसे संवेदनशील प्रोजेक्टों के ऊपर मंडराने वाले संभावित ड्रोन खतरे पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर और ज्यादा मजबूत होगी।
