
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश-भूस्खलन से तबाही का दौर जारी है। बुधवार को चंबा जिले में दो जगह भूस्खलन से भाई-बहन समेत चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो लापता हैं। भरमौर के होली क्षेत्र के हलूण गांव में नाले में बाढ़ आने से नौ घरों के बहने की सूचना है। हालांकि, प्रशासनिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मणिमहेश यात्रा पर गए करीब 20,000 श्रद्धालु जगह-जगह फंसे हैं। घायल छह श्रद्धालुओं को भरमौर से चंबा मेडिकल कॉलेज में एयरलिफ्ट किया गया है। उधर, रावी नदी उफान पर है और आसपास के घर खाली करवाए गए हैं।
चंबा जिले में तीसरे दिन भी मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं। शहर में 28 घंटे बाद बिजली बहाल हुई। भरमौर-पठानकोट हाईवे समेत अन्य जगहों पर सड़कें बंद होने से जरूरी चीजों की सप्लाई तीन दिन से बंद है। पानी और गैस सिलिंडर का संकट है। चंबा जिला मुख्यालय से सटी बसोधन पंचायत में एक भाई और बहन भूस्खलन की चपेट में आकर मौत का शिकार हो गए। दोनों घर के पास हो रहे भूस्खलन को देखने के लिए जैसे ही बाहर निकले, मलबा अचानक उन पर आ गिरा। मैहला विकास खंड के तहत भिमला पंचायत में चार महिलाएं घर के पास काम कर रही थीं। अचानक पहाड़ी से मलबे की चपेट में आ गईं। इसमें दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं घायल हैं। मैहला विकास खंड में दो लोग लापता बताए जा रहे हैं।
लगातार तीन दिन बारिश के बाद बुधवार को कुल्लू-लाहौल में मौसम साफ रहा। कुल्लू-मनाली हाईवे-तीन के साथ सड़कों व बिजली-पानी की बहाली का काम तेजी से शुरू कर दिया है। मनाली और लाहौल घाटी अभी देश-दुनिया से कटी है। प्रशासन ने कुल्लू से मनाली के अलेऊ तक वामतट सड़क को छोटे वाहनों के लिए बहाल कर दिया है। कुल्लू से मनाली के बीच एनएच को बहाल करना चुनौती है। बागवान चौथे दिन भी सेब को तुड़ान नहीं कर पाए और मंडियों में सन्नाटा पसरा रहा। मनाली व लाहौल में बिजली व इंटरनेट सेवा के साथ दूरसंचार सेवा बंद रही। मनाली में फंसे सैलानियों से परिजनों की बातचीत नहीं हो पा रही है। हालांकि, सभी सैलानी यहां सुरक्षित हैं। जिले में 100 से अधिक मुख्य व ग्रामीण सड़कें बंद हैं। बंजार से लेकर मनाली व लाहौल तक सैकड़ों गांवों में अंधेरा पसरा है। कुल्लू शहर में तीन दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जिला में 80 के करीब योजनाएं प्रभावित हैं।
कांगड़ा में नदी-नालों में बाढ़ से पौंग बांध में जलस्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। बुधवार दोपहर को बांध का जलस्तर 1393.61 फीट रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान से तीन फीट ज्यादा है। वहीं, बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण इंदौरा और फतेहपुर क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। एनडीआरएफ की टीम ने बुधवार को 15 लोगों को रेस्क्यू किया।
मंडी जिले में चंडीगढ़-मनाली एनएच मंडी-कुल्लू के बीच करीब 72 घंटे बाद छोटे वाहनों के लिए बहाल हो गया है। लाहौल घाटी में करीब पांच सौ वाहन अलग-अलग स्थानों में फंसे हैं। उपायुक्त के अनुसार घाटी में फंसे लोगों के लिए अलग-अलग स्थानों में रहने की व्यवस्था की गई है। यहां उनके लिए खाने आदि का भी प्रबंध किया गया है।
हिमाचल प्रदेश के पांच जिलों ऊना, हमीरपुर, मंडी, शिमला और सिरमौर के कई क्षेत्रों में वीरवार को बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। 29 अगस्त को इन पांच जिलों के अलावा कांगड़ा के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 30 और 31 अगस्त को चंबा, कांगड़ा और मंडी के लिए चेतावनी जारी की गई है। राज्य के कई भागों में 2 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। बुधवार को प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ रहा। दोपहर बाद शहर में हल्की बूंदाबांदी हुई। मंगलवार रात को चंबा में 51 धर्मशाला में 40.4, जोत में 38.0, श्री नयना देवी जी में 26.8, पालमपुर में 22.4, कांगड़ा में 21.6, बिलासपुर में 20.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
हिमाचल में जारी बारिश के बीच मानसून सीजन के दौरान अभी तक कुल 2623 करोड़ का नुकसान हो चुका है। इस मानसून सीजन में 20 जून से 27 अगस्त तक 310 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 369 लोग घायल हुए हैं। 38 लोग अभी लापता हैं। 158 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है। इस सीजन बादल फटने की 42 एवं भूस्खलन की 82 घटनाओं में अब तक 2719 कच्चे-पक्के घरों, 481 दुकानों को क्षति हुई है। 3192 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
प्रदेश में अगस्त के दौरान सामान्य से 62 फीसदी और मानसून सीजन के दौरान 20 जून से अभी तक 30 फीसदी अधिक बादल बरसे हैं। अगस्त के दौरान सभी जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। इस अवधि में 234 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया है, इस वर्ष 381 मिलीमीटर बारिश हुई। मानसून सीजन के दौरान अभी तक 591 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया है। इस साल इस अवधि में 767 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
दूरसंचार विभाग के अपर महानिदेशक ने बताया कि चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में इंट्रा सर्किल रोमिंग सुविधा सात दिनों के लिए (तीन सितंबर तक) सक्रिय कर दी गई है। यह पहल प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ता अपने डिवाइस की सेटिंग्स में जाकर किसी भी उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क का मैनुअल रूप से चयन कर सकते हैं। चाहे वह उनके मूल सेवा प्रदाता का नेटवर्क न हो। सुविधा की अवधि के दौरान उपभोक्ता किसी भी ऐसे टेलीकॉम ऑपरेटर के नेटवर्क से जुड़कर सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे, जिसका उस क्षेत्र में नेटवर्क है।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि चंबा और कुल्लू में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से निकाला जाएगा। प्राकृतिक आपदा के चलते चंबा के गौरीकुंड में 100, धन्छो में 500, भरमौर के चौरासी मंदिर में 600 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। अन्य स्थानों में भी लोगों के फंसने की सूचना है। गौरीकुंड से कुछ लोगों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया भी जा चुका है। वहीं, मनाली से भी कुछ लोग एयरलिफ्ट किए गए हैं। राजस्व मंत्री ने यह जानकारी चंबा के विधायक नीरज नैयर, चुराह के विधायक हंसराज और डलहौजी के विधायक डीएस ठाकुर की ओर से नियम 62 के तहत लाए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में दी।
राजस्व मंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सरकार राहत पैकेज दे रही है। उन्होंने बताया कि जिनके घर आपदा में जमींदोज हो गए हैं, उनको तो सरकार राहत दे ही रही है, साथ ही उन मकानों में रहने वाले किरायेदारों को भी भेंट चढ़े सामान का 50 हजार रुपये किराया दिया जाएगा। पॉलीहाउस नष्ट होने पर भी सरकार ने मुआवजा देने का फैसला लिया है।
