हिमाचल प्रदेश पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी एवं पूर्व एसएसपी शिमला संजीव गांधी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के तहत उनके खिलाफ एक और प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
यह कार्रवाई पुलिस जवानों के आवासों तथा पुलिस भवनों की मरम्मत और रखरखाव (Maintenance & Repair) के लिए आवंटित फंड का व्यक्तिगत तौर पर इस्तेमाल करने के आरोपों के बाद हुई है।
ऑडिट रिपोर्ट में हुआ अनियमितताओं का पर्दाफाश
पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- 14.07 लाख रुपये सरकारी आवास पर खर्च: वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत के लिए कुल 1.28 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसमें से 14,07,392 रुपये तत्कालीन एसएसपी संजीव गांधी के सरकारी आवास ‘साउथवुड’ (Southwood) पर खर्च किए दिखाए गए।
- पूर्व स्वीकृति और बजट का अभाव: रिपोर्ट के अनुसार, ‘साउथवुड’ आवास की मरम्मत या नवीनीकरण के लिए न तो सरकार और न ही पुलिस मुख्यालय की ओर से कोई अलग बजट स्वीकृत किया गया था। ये कार्य मूल प्रस्तावों में भी शामिल नहीं थे और न ही आवश्यक पूर्व स्वीकृति से संबंधित कोई दस्तावेज रिकॉर्ड में मिले।
- अन्य क्षेत्रों के फंड का डायवर्जन:
- रामपुर एसडीपीओ आवास: रामपुर में एसडीपीओ (SDPO) आवास की मरम्मत के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये की राशि को तत्कालीन एसएसपी के सरकारी आवास पर खर्च दिखाया गया।
- शोघी पुलिस बैरियर: शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए मंजूर किए गए 2.50 लाख रुपये भी एसएसपी आवास पर खर्च दर्शाए गए। ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख है कि शोघी में मरम्मत का कोई काम पूरा होने का प्रमाण नहीं मिला है।
- वर्षवार खर्च का ब्योरा: वर्ष 2023-24 में 1.62 लाख रुपये और वर्ष 2024-25 में 7.22 लाख रुपये सरकारी आवास पर खर्च दिखाए गए हैं। इन कार्यों के लिए जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा या पूर्व स्वीकृति के कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
50 में से केवल 22 प्रस्तावों का मिला रिकॉर्ड
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के लिए 28.67 लाख रुपये के बजट के तहत कुल 50 कार्य प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि, जांच में इनमें से केवल 22 कार्यों का ही रिकॉर्ड उपलब्ध पाया गया, जिनमें से 13 कार्य मूल रूप से स्वीकृत प्रस्ताव से बाहर के थे।
इसके अतिरिक्त, प्रेस विज्ञप्ति में शोघी पुलिस पोस्ट की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया गया कि यह पुलिस पोस्ट आज भी एक कंटेनर से संचालित हो रही है। जवानों को अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है, जबकि उनके कल्याण और सुविधाओं के लिए आया फंड अधिकारियों के आवास पर खर्च कर दिया गया।
तबादले के बाद भी नहीं खाली किया सरकारी आवास
संजीव गांधी का फरवरी 2026 में शिमला के एसएसपी पद से तबादला कर दिया गया था। प्रचलित नियमों के अनुसार, पद छोड़ने के बाद कोई भी अधिकारी अधिकतम एक माह तक ही सरकारी आवास अपने पास रख सकता है। इसके बावजूद, प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने अब तक निर्धारित सरकारी आवास ‘साउथवुड’ खाली नहीं किया है।
मामला दर्ज, जांच शुरू
- FIR का विवरण: पुलिस थाना सदर शिमला में 22 अक्तूबर को FIR संख्या 139/2026 दर्ज की गई है।
- संबंधित कानून: यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) (Criminal Breach of Trust by Public Servant – लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत दर्ज किया गया है।
- पुलिस का बयान: वर्तमान एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस मुख्यालय को प्रकरण संज्ञान में लाए जाने के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच निष्पक्ष रूप से जारी है और साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

