शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार मौसम की बेरुखी ने सेब बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। प्रदेश में सेब का सीजन लगभग आधा रह गया है। पिछले वर्ष जहां राज्य में करीब 3.50 करोड़ पेटियों का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार पैदावार घटकर करीब 1.70 करोड़ पेटियों तक सिमटने का अनुमान है। यानी एक साल में सेब उत्पादन में करीब 1.80 करोड़ पेटियों की गिरावट आई है।

मौसम की मार का असर केवल बागवानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेब कारोबार से जुड़े परिवहन, पैकेजिंग, मंडियों और प्रदेश के बाजारों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

छह साल में सबसे कम उत्पादन का अनुमान

बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2021 में 3.05 करोड़, 2022 में 3.36 करोड़, 2023 में 2.11 करोड़, 2024 में 2.51 करोड़ और 2025 में करीब 3.49 करोड़ पेटियों का उत्पादन हुआ था। वहीं, वर्ष 2026 में उत्पादन घटकर करीब 1.70 करोड़ पेटियों तक रहने का अनुमान है।

बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा के अनुसार प्रदेश में अभी तक करीब 1.40 करोड़ पेटियां बाजार में पहुंची हैं। कुल उत्पादन का आकलन करते समय मंडियों में पहुंचे सेब के अलावा मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस), सीए स्टोर और अन्य सरकारी खरीद को भी शामिल किया जाता है।

मौसम की बेरुखी ने बिगाड़ा बागवानों का गणित

इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव ने सेब की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। फूल आने के महत्वपूर्ण समय में तापमान में अचानक गिरावट, पर्याप्त चिलिंग आवर्स नहीं मिलना और बार-बार हुई ओलावृष्टि के कारण फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसका सीधा असर पैदावार और फलों की गुणवत्ता पर पड़ा।

बागवानी अर्थव्यवस्था को 2,000 करोड़ तक नुकसान

हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान के अनुसार बागवानी विभाग नुकसान का आकलन करीब 1,000 करोड़ रुपये के आसपास कर रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे कहीं गंभीर है। उनके मुताबिक प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था को इस बार करीब 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।

शिमला के कारोबार में भी 30 से 35 फीसदी गिरावट

सेब सीजन कमजोर रहने का असर प्रदेश के कारोबारियों पर भी पड़ा है। हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह के अनुसार शिमला में कारोबारियों की बिक्री में करीब 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

सेब सीजन के दौरान बागवानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के हाथ में पैसा आने से बाजार में खरीदारी बढ़ती है। लेकिन इस बार फसल कमजोर रहने से बागवानों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है।

सोने-चांदी की खरीद पर भी पड़ा असर

कमजोर सेब सीजन का असर सर्राफा कारोबार पर भी आंशिक रूप से पड़ा है। हिमाचल प्रदेश सर्राफा एवं स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष अतुल टांगरी के अनुसार बागवानों की आमदनी प्रभावित होने से सोने और चांदी की खरीदारी पर असर देखने को मिला है। हालांकि, कीमतों में गिरावट के कारण कुछ ग्राहक खरीदारी के लिए बाजार भी पहुंच रहे हैं।

10 नवंबर को औपचारिक रूप से समाप्त होगा सीजन

प्रदेश में सेब सीजन को 31 अक्तूबर से बढ़ाकर 10 नवंबर तक कर दिया गया है। हालांकि, अधिकांश क्षेत्रों में सेब की तुड़ान का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल स्पीति और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से ही सेब बाजार में पहुंच रहा है।

इस बार कम उत्पादन ने हिमाचल की बागवानी अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इसका असर आने वाले समय में बागवानों के साथ-साथ प्रदेश के छोटे-बड़े कारोबारियों पर भी देखने को मिल सकता है।