लाहौल-स्पीति: लाहौल घाटी में सेब का सीजन पूरी रफ्तार से चल रहा है और इस बार बागवानों के चेहरे खिले हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और शिमला जैसे पारंपरिक सेब उत्पादक क्षेत्रों में इस बार फसल कम होने के कारण लाहौल के सेब की मांग देश भर की मंडियों में अचानक काफी बढ़ गई है। अच्छी गुणवत्ता और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की खूबी के चलते व्यापारी घाटी का रुख कर रहे हैं।

लाहौली सेब की प्रमुख विशेषताएं:

  • मोटा छिलका और लंबी शेल्फ लाइफ: लाहौल के सेब का छिलका मोटा होता है, जिसके कारण इसे लंबे समय तक सुरक्षित (स्टोर) रखा जा सकता है। यही वजह है कि व्यापारी इस सेब को ज्यादा पसंद करते हैं।
  • रसीला और स्वादिष्ट: अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, स्वाद और रस के कारण यह सेब देश की प्रमुख मंडियों में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है।

उत्पादन और बेहतर कीमतें: बागवानी विभाग उदयपुर के अधिकारी प्यारे लाल के अनुसार, घाटी में पिछले दो दशकों से सेब उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में लाहौल घाटी के लगभग 1150 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है, जो स्थानीय किसानों के लिए आय का एक मजबूत जरिया बन गया है।

इस सीजन में बाजार के आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं:

  • कीमतें: वर्तमान में घाटी में 20 किलो सेब की पेटी 1300 से 1500 रुपये तक बिक रही है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है।
  • बागवानों का रुझान: इस बार घाटी के 70 प्रतिशत से अधिक बागवानों ने अपने बगीचे ठेके पर दे दिए हैं, जिससे उन्हें सीधा और अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

विभाग का प्रयास: बागवानी विभाग द्वारा बागवानों को लगातार उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में सेब के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता में और अधिक सुधार किया जा सके। फिलहाल, देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे बड़े व्यापारियों की आवाजाही से लाहौल घाटी में व्यापार तेजी से बढ़ रहा है।

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