
हिमाचल प्रदेश में किसानों को खाद उपलब्ध करवाने वाली व्यवस्था पर करोड़ों रुपये की देनदारी भारी पड़ गई है। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ लिमिटेड (हिमफेड) पर करीब 5.50 करोड़ रुपये की देनदारी के चलते इफको ने खाद की आपूर्ति बंद कर दी है। प्रदेशभर में कई निजी दुकानदारों और सरकारी डिपुओं तक हिमफेड के माध्यम से खाद पहुंचाई जाती है। इस बीच इफको की सप्लाई रुकने से आने वाले दिनों में किसानों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। हालांकि फिलहाल यूरिया की उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन डीएपी और एनपीके की नियमित आपूर्ति को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रदेश के किसानों में इफको की खाद की खास मांग रहती है। ऐसे में हिमफेड को इफको से खाद की बड़ी खेप नहीं मिलना सीधे तौर पर प्रदेश की खाद आपूर्ति व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा। हालात को देखते हुए हिमफेड ने अब इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) से खाद की खरीद शुरू की है। आईपीएल की ओर से करीब 250 टन यूरिया हिमफेड को भेजी गई है।
क्या बोले किसान
किसान जसविंदर सिंह ने कहा कि पहले खाद की आपूर्ति सुचारु तरीके से होती थी, लेकिन करीब चार माह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल यूरिया खाद आसानी से उपलब्ध हो रही है, लेकिन डीएपी और एनपीके की पर्याप्त सप्लाई नहीं पहुंच रही। उन्होंने कहा कि खेती का काम प्रभावित हो रहा है और आने वाले समय को लेकर किसान चिंतित हैं। किसान प्रेम चंद ने कहा कि सितंबर में आलू की खेती शुरू होने के साथ एनपीके खाद की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई तो किसानों के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यूरिया मिल रही है, लेकिन डीएपी और एनपीके की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है
इफको के क्षेत्रीय प्रबंधन पवन कुमार ने बताया कि हिमफेड पर करीब 5.50 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसी वजह से हिमफेड के लिए खाद की आपूर्ति बंद की गई है। यदि इस संबंध में उच्च अधिकारियों से कोई नया आदेश प्राप्त होता है तो उसी के अनुसार आगामी कदम उठाए जाएंगे।
हिमफेड ऊना के विपणन सहायक कमलेश कुमार ने बताया कि प्रदेशभर में हिमफेड के करीब 85 स्टोर हैं। इन स्टोरों के माध्यम से निजी दुकानदारों के साथ सरकारी डिपुओं को भी खाद की आपूर्ति की जाती है। हिमफेड की आपूर्ति व्यवस्था लगातार जारी है। इसके लिए आईपीएल से खाद की आपूर्ति हुई है। मांग के अनुसार अभी भी खाद की आपूर्ति कम है।
