
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत हिमाचल प्रदेश में बनने वाली सड़कों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने बजट में बढ़ोतरी की है। अब सड़क निर्माण के लिए प्रति किलोमीटर 90 लाख रुपये के बजाय 1 करोड़ 60 लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई लागत के अनुरूप बजट मिलने से दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को गति मिल सकेगी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के समक्ष यह मामला उठाया था।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत चरण चार में 2247 करोड़ मंजूरी किए हैं। इस राशि से प्रदेश की 294 सड़कों का निर्माण होना है। 235 सड़कों के टेंडर अवार्ड हो चुके हैं लेकिन 59 सड़कों के टेंडर के लिए ठेकेदार आवेदन नहीं कर रहे हैं। इसमें जिला शिमला की सबसे ज्यादा सड़कें है। क्लास वन ठेकेदार काम करने में रूचि नहीं ले रहे हैं। सिंगल टेंडर आने से लोक निर्माण विभाग को टेंडर रद्द करना पड़ रहा है। डलहौजी, मंडी, शिमला, तीसी, भटियात आदि सड़कों के टेंडर फंस गए हैं। एक अन्य बड़ी वजह पीएमजीएसवाई के तहत ठेकेदारों पर पांच वर्षों तक सड़क के रखरखाव (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी भी है।
निर्माण के बाद सड़क की मरम्मत और रखरखाव ठेकेदारों को करना पड़ता है। पीएमजीएसवाई का उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। बजट में बढ़ोतरी से न केवल निर्माण कार्यों को गति मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े कार्यों को भी मजबूती मिलेगी। विभाग ने अधिकारियों को संशोधित प्रावधानों के अनुरूप आगामी टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सड़क परियोजनाओं में आ रही बाधाएं दूर की जा सकें। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ नरेंद्र पॉल ने कहा कि पीएमजीएसवाई चरण चार में अधिकांश सड़कों के टेंडर किया जा चुके हैं। कई टेंडर नहीं हो पाए हैं। इसके लिए ठेकेदार आगे नहीं आ रहे हैं। दोबारा से इन टेंडरों को किया जा रहा है।
