हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एसएमसी शिक्षकों को 5 फीसदी एलडीआर भर्ती कोटा और अदालत के आदेशों की अवमानना मामले में नोटिस जारी किए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब दायर करे। हाईकोर्ट ने यह आदेश एक अवमानना याचिका देवेंद्र शर्मा और अन्य बनाम एम सुधा देवी मामले में जारी की है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद राज्य सरकार शिक्षकों की नियमित नियुक्ति के बजाय एसएमसी शिक्षकों की नियमित नियुक्ति के लिए के लिए आरएंडपी रूल्स में 5 फीसदी कोटा निर्धारित कर रही है।

यह सरासर अन्यायपूर्ण है। अगर 5 फीसदी कोटा एसएमसी को निर्धारित किया जाता है, तो इससे उनकी नियुक्ति के भविष्य में कोई आसार नजर नहीं आते हैं, क्योंकि इन दोनों की भर्तियों की प्रक्रिया अलग-अलग है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 2012 के बाद प्रदेश में शिक्षकों की कमी के चलते पहली से 12वीं तक बच्चों को पढ़ने के लिए एसएमसी आधार पर अध्यापकों की नियुक्ति शुरू की। एसएमसी शिक्षकों की नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में एसएमसी शिक्षकों को नियुक्त करने की अनुमति देने वाली राज्य सरकार की 17 जुलाई 2012 की संबंधित नीति को रद्द करने की प्रार्थना की गई।

हिमाचल हाईकोर्ट ने एसएमसी शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि शिक्षकों के पद खाली होने की वजह से फौरी तौर पर एसएमसी शिक्षकों को भर्ती किया गया है, जिससे प्रदेश में शिक्षा के स्तर को बरकरार रखा जा सके। सरकार ने तर्क दिया था कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होने तक यह शिक्षक अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बैंच ने 24 नवंबर 2020 को एसएलपी को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को शिक्षकों की नियुक्ति आरएंडपी के तहत करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में लगभग 2400 एसएमसी शिक्षक पिछले 10- 15 साल से कार्यरत हैं।