
शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम से जुड़े एक अहम मामले में बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए मृतक की मां के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में मृतक के खून में 299.73 मिलीग्राम अल्कोहल पाया गया था, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि सिर्फ खून में शराब मिलने से यह साबित नहीं होता कि सड़क हादसा शराब के सेवन के कारण हुआ था।
मामला रामपुर के सनारसा निवासी दुशांत गौतम का है, जिन्होंने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से 20 लाख रुपये की पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। पॉलिसी की अवधि 13 फरवरी 2019 से 12 फरवरी 2020 तक थी।
1 दिसंबर 2019 को भावानगर क्षेत्र में सड़क पर पैदल चलते समय दुशांत को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मामले में एफआईआर भी दर्ज की थी।
दुशांत की मां और नॉमिनी मनी देवी ने बीमा कंपनी से 20 लाख रुपये के क्लेम की मांग की, लेकिन कंपनी ने 8 अक्टूबर 2020 को दावा खारिज कर दिया। कंपनी ने फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृतक के खून में 299.73 मिलीग्राम अल्कोहल पाया गया था।
इसके बाद मामला जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। जिला आयोग ने 13 नवंबर 2024 को बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये की बीमा राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। इसके अलावा 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के भी निर्देश दिए गए।
बीमा कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने अपील खारिज कर दी।
आयोग ने कहा कि दुशांत वाहन नहीं चला रहे थे, बल्कि पैदल चल रहे थे और उन्हें अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी थी। केवल रक्त में अल्कोहल पाए जाने से यह साबित नहीं होता कि हादसा शराब के सेवन के कारण हुआ।
इस तरह राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी को मृतक की मां को निर्धारित राशि का भुगतान करने का रास्ता साफ कर दिया।
इसी मामले से जुड़े फैसले में आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना वैध परमिट सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने की स्थिति में बीमा कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं होगी। इसके अलावा आनी की अदालत ने एक पिकअप हादसे में जान गंवाने वाले हेल्पर-कम-कंडक्टर के परिजनों को 18.95 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
