शिमला। हिमाचल प्रदेश में सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचाने, अतिक्रमण करने या सड़क किनारे मलबा डालने वालों पर अब सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया।


प्रस्तावित संशोधन के तहत सड़क या पुल को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति से सड़क को दोबारा बनाने या नुकसान की भरपाई में आने वाली लागत का पांच गुना तक जुर्माना वसूला जा सकेगा। विभाग जरूरत पड़ने पर मरम्मत या पुनर्स्थापन का काम खुद करवाकर उसका पूरा खर्च और निर्धारित जुर्माना संबंधित व्यक्ति से वसूल सकेगा।


🚧 मलबा डालने पर भी भारी जुर्माना
विधेयक में सड़क किनारे अनधिकृत तरीके से मलबा या सामग्री डालने पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। अनधिकृत खनन या मलबा फेंकने पर 1,000 रुपये प्रति घन मीटर प्रतिदिन और जमा सामग्री पर 2,000 रुपये प्रति घन मीटर प्रतिदिन जुर्माना लगाया जा सकेगा।


अनधिकृत होर्डिंग लगाने पर 2,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति सप्ताह जुर्माने का प्रावधान है। नियमों का उल्लंघन दोहराने पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।


🗺️ डिजिटल मैपिंग से होगी अतिक्रमण की पहचान
सड़क सुरक्षा और संरक्षण के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी प्रस्तावित है। जीपीएस और भू-स्थानिक तकनीक की मदद से सड़कों की डिजिटल मैपिंग कर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर मैप तैयार किया जाएगा।


इन डिजिटल नक्शों को इलेक्ट्रॉनिक रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे सड़क की सीमाओं का सटीक निर्धारण और अतिक्रमण की पहचान करना आसान होगा।


🚙 सड़क पर छोड़ी मशीनरी भी होगी जब्त
सड़क किनारे छोड़े गए जब्त वाहन, मशीनरी या अन्य सामग्री को विभाग जब्त कर सकेगा। इसके लिए 2,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना भी लगाया जाएगा। निर्धारित अवधि में अगर कोई व्यक्ति जब्त सामग्री पर दावा नहीं करता है तो उसे सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से बेचने का प्रावधान भी किया गया है।


विधेयक में सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने, अंतिम मांग आदेश का जानबूझकर भुगतान नहीं करने या सड़क बंद करने संबंधी आदेशों का उल्लंघन करने पर दो वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।


⚠️ सड़क-पुल पर आवाजाही भी रोकी जा सकेगी
लोक सुरक्षा के हित में संबंधित प्राधिकारी को किसी सड़क या पुल पर वाहनों की आवाजाही को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित या बंद करने का अधिकार देने का भी प्रावधान है।


यह संशोधन करीब दो दशक पुराने कानून में बदलाव के जरिए सड़क संरक्षण, अतिक्रमण रोकने और सड़क अवसंरचना को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को और सख्त करने के उद्देश्य से लाया गया है।