शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में 177 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। इनमें कई स्कूल रेस्ट हाउस, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, महिला मंडल भवन और दूसरे स्कूलों के कमरों में संचालित हो रहे हैं।


विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यह जानकारी विधानसभा में दी। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक भवनविहीन स्कूलों में से 12 स्कूलों के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित घोषित किए गए हैं। वहीं 28 स्कूलों के नए भवन निर्माणाधीन हैं, जबकि 14 स्कूलों के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है।


बाकी स्कूलों के लिए जमीन उपलब्ध न होना और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अड़चनें नए भवनों के निर्माण में बाधा बनी हुई हैं।
रेस्ट हाउस के चार कमरों में पढ़ रहे 99 विद्यार्थी
इस स्थिति का एक उदाहरण चंबा जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनरा में देखने को मिलता है। स्कूल का भवन प्राकृतिक आपदा के बाद असुरक्षित घोषित कर दिया गया, जिसके बाद विद्यार्थियों को लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस में शिफ्ट करना पड़ा।


फिलहाल यहां 99 विद्यार्थी महज चार कमरों में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री के अनुसार स्कूल के नए भवन के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जब तक स्थायी भवन तैयार नहीं होता, विद्यार्थियों को इसी अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करनी होगी।
1,526 स्कूल बंद हुए, 1,473 भवन अभी भी विभाग के पास
विधानसभा में एक और अहम आंकड़ा सामने आया।

पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में 1,526 स्कूल बंद किए गए, लेकिन इनमें से 1,473 स्कूलों के भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास मौजूद हैं।
इनमें से 577 भवन विभिन्न विभागों और संस्थाओं को उपयोग के लिए दिए गए हैं। इन भवनों में पंचायती राज विभाग, आंगनबाड़ी केंद्र, महिला मंडल, युवक मंडल, स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन, पर्यावरण एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग और मंदिर समितियां अपनी गतिविधियां संचालित कर रही हैं।


वहीं, बंद किए गए 53 स्कूलों के पास अपना कोई सरकारी भवन नहीं था। ये पहले से ही निजी या किराये के भवनों में चल रहे थे, इसलिए इनके बंद होने के बाद शिक्षा विभाग को कोई भवन नहीं मिला।
पंजाबी शिक्षकों के 37 पद खाली
विधानसभा में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पंजाबी शिक्षकों की स्थिति को लेकर भी जानकारी सामने आई। 100 स्वीकृत पदों में से 37 पद अभी भी खाली हैं। प्रदेश में फिलहाल 63 पंजाबी शिक्षक कार्यरत हैं।


जिलेवार आंकड़ों के अनुसार ऊना में 22, सोलन में छह, चंबा में तीन, सिरमौर में तीन, कांगड़ा में दो और शिमला में एक पद रिक्त है। सरकार के अनुसार इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जॉब ट्रेनी नीति के तहत 17 पदों पर भर्ती की कार्रवाई चल रही है।


वहीं, पंजाब से सटे हिमाचल के क्षेत्रों में पंजाबी को दूसरी भाषा या वैकल्पिक विषय के तौर पर लागू करने की संभावना को सरकार ने खारिज कर दिया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में पहले से हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़ाई जा रही हैं और चौथी भाषा को शामिल करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।