
हिमाचल प्रदेश में ओबीसी वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण और क्रीमी लेयर की व्यवस्था खत्म करने की मांग को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश सरकार ने केंद्र की तर्ज पर 27 फीसदी आरक्षण लागू करने और क्रीमी लेयर खत्म करने से साफ इन्कार कर दिया है।
राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई ओबीसी कल्याण बोर्ड की बैठक में समुदाय से जुड़ी विभिन्न मांगों पर विभागों की ओर से सरकार का पक्ष रखा गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 27 फीसदी आरक्षण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के फैसले और संविधान के अनुच्छेद 16(4) का हवाला दिया।
हिमाचल में OBC की आबादी 15.27 फीसदी
सरकार के अनुसार आरक्षण केवल आबादी के अनुपात के आधार पर तय नहीं होता, बल्कि संबंधित वर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व को भी आधार माना जाता है।
प्रदेश में ओबीसी की आबादी 15.27 फीसदी यानी 9,27,542 बताई गई है। कार्मिक विभाग के अनुसार सीधी भर्ती में श्रेणी-1 और 2 के पदों पर ओबीसी को 12 फीसदी, जबकि श्रेणी-3 और 4 में 18 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा संवैधानिक और न्यायिक व्यवस्था के तहत 27 फीसदी आरक्षण की मांग को स्वीकार करना संभव नहीं है।
क्रीमी लेयर खत्म करने पर भी राहत नहीं
ओबीसी वर्ग की क्रीमी लेयर खत्म करने की मांग पर भी सरकार ने कोई राहत नहीं दी है। संबंधित विभाग ने स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद लागू हुआ है और इसे खत्म करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
हालांकि, क्रीमी लेयर की आय सीमा में समय-समय पर संशोधन किया जा सकता है।
युवाओं के लिए ऋण सीमा बढ़ी
बैठक में ओबीसी वर्ग के युवाओं के लिए कुछ राहत की जानकारी भी सामने आई। पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम ने बताया कि पांच लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले पात्र लोगों के लिए स्वरोजगार ऋण की सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।
वहीं शिक्षा ऋण पर ब्याज दर कम करने की मांग को राष्ट्रीय निगम के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया गया है।
OBC प्रमाणपत्र के प्रारूप में बदलाव पर विचार
ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता बढ़ाने की मांग पर राजस्व विभाग ने बताया कि इस संबंध में अधिकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय के अधीन है।
हालांकि, राज्य और केंद्र के ओबीसी प्रमाणपत्र के प्रारूप को एक समान करने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। इसके लिए लैंड रिकॉर्ड्स मैनुअल-1992 के अध्याय 28 में संशोधन करना होगा।
पांच फीसदी से कम आबादी वाले ब्लॉकों में आरक्षण नहीं
पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर भी नियम स्पष्ट किए गए हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अनुसार जिन विकास खंडों में ओबीसी आबादी पांच फीसदी से कम है, वहां नियमों के तहत ओबीसी आरक्षण का प्रावधान नहीं है।
चंबा जिले का सलूणी विकास खंड इसका उदाहरण बताया गया है।
इस तरह 27 फीसदी आरक्षण और क्रीमी लेयर खत्म करने की मांग पर फिलहाल सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, जबकि ओबीसी प्रमाणपत्र और युवाओं के लिए ऋण जैसी कुछ मांगों पर राहत या बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात सामने आई है।
