
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश और भूस्खलन से हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की 10 सितंबर सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बारिश और भूस्खलन के कारण 63 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इसके अलावा दो बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) और दो पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
सबसे ज्यादा असर मंडी जिले में देखने को मिल रहा है, जहां अकेले 33 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 11 और कांगड़ा में 10 सड़कें यातायात के लिए बाधित हैं। सिरमौर और ऊना में तीन-तीन, शिमला में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है।
जिला स्तर पर देखें तो मंडी के सराज क्षेत्र में 28, सुंदरनगर में एक, सरकाघाट में तीन और थलौट में एक सड़क बंद है। वहीं बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, किन्नौर और सोलन में सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक कोई सड़क बंद नहीं थी।
मानसून में 286 लोगों की मौत
राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की 30 जून से 9 सितंबर 2026 तक की संचयी रिपोर्ट ने मानसून से हुए नुकसान की भयावह तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में हिमाचल प्रदेश में 286 लोगों की जान गई, जबकि 513 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 1,144 पशुओं की भी मौत दर्ज की गई है।
मानसून के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का आंकड़ा 1,55,032.82 लाख रुपये यानी करीब 1,550.33 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुल 286 मौतों में से 114 मौतें आपदा से जुड़ी घटनाओं में हुई हैं, जबकि 172 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है।
आपदा से हुई मौतों में भूस्खलन से 18, फ्लैश फ्लड से एक, डूबने से 15, आग से एक, सांप के काटने से 12, करंट लगने से 10 और पेड़ या खड़ी चट्टान से गिरने से 39 मौतें शामिल हैं। इसके अलावा अन्य कारणों से 18 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित
सड़क बंद होने के मामले में मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है। जिले में 33 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 11 और कांगड़ा में 10 सड़कें बाधित हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
9 सितंबर की शाम को प्रदेश में 64 सड़कें बंद थीं, जबकि 10 सितंबर की सुबह यह संख्या घटकर 63 रह गई। हालांकि बिजली आपूर्ति से जुड़ी स्थिति में थोड़ा बदलाव हुआ है और प्रभावित DTR की संख्या एक से बढ़कर दो हो गई है।
कुल मिलाकर मानसून से अब तक 286 मौतें और 1,550 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है, जबकि प्रदेश की 63 सड़कें अभी भी बंद हैं। ऐसे में मंडी, कुल्लू और कांगड़ा समेत प्रभावित जिलों में सड़क संपर्क बहाल करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
