
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिला चंबा स्थित बैरा स्यूल बिजली परियोजना के अधिग्रहण की हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी जा रही है। सर्वश्रेष्ठ वकीलों को पैरवी के लिए नियुक्त किया गया है। विधायक नीरज नैय्यर के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 40 साल की अवधि पूरी होने पर बैरा स्यूल परियोजना का अधिग्रहण करने के लिए एनएचपीसी को नोटिस दिया गया था। कंपनी हाईकोर्ट चली गई है। वहां से उन्हें स्टे मिला है। सितंबर में ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा भी होनी है। हिमाचल के अधिकारों को प्राप्त करना सरकार की प्राथमिकता है। लाडा का एक फीसदी हिस्सा देने का मामला भी कोर्ट में है। इससे पहले विधायक नीरज ने कहा कि एनएचपीसी की परियोजनाएं चंबा जिला में लगी हैं, लेकिन कंपनी रोजगार और मुआवजा नहीं दे रही। विधायक हंसराज ने कहा कि एनएचपीसी ने अस्पताल भी शर्त के मुताबिक नहीं बनाया। स्कूल को किसी अन्य संस्था को दे दिया है। एनएचपीसी अपने वादे पूरी नहीं कर रही है।
जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला चंबा में एनएचपीसी की ओर से 4 जल विद्युत परियोजनाएं बैरा स्यूल, चमेरा-1, चमेरा 2 व चमेरा 3 निर्मित की गई हैं। इन परियोजनाओं के तहत कुल 312 परिवार विस्थापित हुए हैं। चमेरा 1 व चमेरा 2 परियोजना के तहत इन 312 परिवारों में से 267 विस्थापित परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया है। 45 परिवार शेष हैं, जो चमेरा-3 परियोजना के कारण विस्थापित हुए हैं। इन्हें रोजगार प्रदान नहीं किया गया है। इनमें से 38 विस्थापित परिवारों की भूमि/मकान का अधिग्रहण वर्ष 2014-15 में किया गया। विस्थापित परिवारों को रोजगार अथवा रोजगार के बदले 5 लाख रुपये का आर्थिक अनुदान देने का प्रावधान है। इसके मद्देनजर इन 38 परिवारों को 5 लाख रुपये का वित्तीय अनुदान प्रदान कर दिया गया है। 7 परिवारों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए एनएचपीसी से मामला उठाया गया है।
शिमला। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने संदिग्ध निष्ठा वाले अफसरों की सूची नहीं मिलने पर सदन में नाराजगी जताई। प्रश्नकाल के दौरान विधायक सतपाल सिंह सत्ती की अनुपस्थिति में सवाल पूछते हुए रणधीर ने कहा कि छह माह से सरकार ऐसे अफसरों की सूची तैयार नहीं कर पा रही है। जो आंकड़े सदन में रखे जा रहे हैं, वह गलत हैं। जिन सवालों की जानकारी नहीं देनी है, उनकी जानकारी एकत्र करने का जवाब दिया जा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त को फैसला लिया है कि शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और मेडिकल शिक्षा विभाग में सेवा विस्तार दिया जाना है। ऐसे में विस्तृत जानकारी तैयार करने में अभी समय लगेगा। जल्द ही जानकारी मुहैया करवा दी जाएगी।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि गत दो वर्षों में 20 फरवरी 2025 तक धारा 118 के तहत अनुमति के लिए कुल 1320 मामले प्राप्त हुए। इनमें से 950 मामलों में स्वीकृति प्रदान की गई है तथा 231 मामले लंबित हैं। इन मंजूरियों के तहत उद्योग, खनन एवं पर्यटन सहित अन्य क्षेत्रों में कुल लगभग 3877 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। भाजपा विधायक बिक्रम सिंह और राकेश जम्वाल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मंत्री नेगी ने बताया कि अभी तक वास्तविक निवेश 302.3336 करोड़ रुपये हुआ है।
कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने कहा कि कुछ अफसरों का रवैया ठीक नहीं है। विभिन्न विभागों की ओर से जो कार्यक्रम विधानसभा क्षेत्रों में होते हैं, उनमें विधायकों को नहीं बुलाया जाता। प्रश्नकाल के दौरान कालिया ने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से अपील करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं से जनता को लाभान्वित किया जा रहा है, लेकिन विधायकों को इस बारे में पता ही नहीं है। जवाब में कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि अफसरों को इस संदर्भ में लिखित निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि गगरेट में आत्मा योजना के तहत 40 पंचायतों के 1533 किसान लाभान्वित किए गए हैं। इस योजना में केंद्र सरकार की 90 फीसदी फंडिंग है।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि प्रदेश में बंदोबस्त प्रक्रिया को जल्द ही आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। विधायक मलेंद्र राजन और केवल सिंह पठानिया के सवाल का जबाब देते हुए राजस्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में भूमि रिकॉर्ड की जमाबंदियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। नक्शों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को दस जिलों में पूरा कर लिया गया है। दो जिलों बिलासपुर और सिरमौर में प्रक्रिया जारी है।
