हिमाचल प्रदेश में मानसून का असर लगातार बना हुआ है और कई जिलों में भारी बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हो गया है। शुक्रवार रात और शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं।

सबसे अधिक असर कुल्लू और शिमला में देखने को मिला। कुल्लू जिले में पिन पार्वती नदी के उफान पर आने से छह से अधिक पुलियां बह गईं, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया। शाक्टी क्षेत्र में दो मकानों में पानी घुसने के बाद प्रशासन ने उन्हें खाली करवाया। जिले में 51 सड़कें अब भी बंद हैं।

राजधानी शिमला में लगातार बारिश के कारण संजौली के बोथवेल क्षेत्र में भूस्खलन से चार मकानों और दो दुकानों पर खतरा मंडरा रहा है। न्यू शिमला सहित कई इलाकों में मलबा गिरने से वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है। कार्ट रोड पर भी भूस्खलन होने से एक देवदार का पेड़ सड़क पर गिर गया, जिसके बाद एहतियातन यातायात रोक दिया गया। पीडब्ल्यूडी की टीम मलबा हटाने और सड़क बहाल करने में जुटी रही।

सिरमौर जिले में भी हालात चिंताजनक हैं। यहां 50 सड़कें बंद, 25 बिजली ट्रांसफार्मर ठप और 58 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। पूरे प्रदेश में अब तक 189 सड़कें, 146 बिजली ट्रांसफार्मर और 104 पेयजल योजनाएं प्रभावित हो चुकी हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने कांगड़ा, मंडी, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और सिरमौर के कई क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कांगड़ा के कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश की संभावना भी जताई गई है। विभाग के अनुसार प्रदेश में 17 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है।धर्मशाला में रविवार सुबह घनी धुंध के कारण दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा। वहीं चिंतपूर्णी में तेज तूफान और मूसलाधार बारिश से बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई।

प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास न जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और राहत एवं बचाव कार्य जारी हैंl