
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला में छह गांवों घलियाड़, दरमेढा, टालिंगा, बालू, कुबनी और रौनाल पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। इनमें से बंजार की तीर्थन घाटी के घलियाड़ और सैंज के दरमेढा गांव पर अधिक खतरा है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन दरमेढ़ा व घलियाड़ गांव का भूवैज्ञानिकों की टीम से सर्वे करवाएगा। बंजार की तीर्थन घाटी के घलियाड़ और सैंज के दरमेढा गांव में करीब 30 परिवारों के 100 से अधिक लोग रहते हैं। जिला प्रशासन ने इन गांवों पर मंडरा रहे भूस्खलन के खतरे को लेकर भूवैज्ञानिकों की टीम से सर्वे करवाने का फैसला लिया है। भूवैज्ञानिक दोनों गांवों की मिट्टी की जांच करेंगे और गांवों से पीछे से दरक रही पहाड़ियों के खतरों का कारण जानेंगे। इसको लेकर एसडीएम बंजार रिपोर्ट तैयार करने में जुट गए हैं और इसे जिला प्रशासन के माध्यम से भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को सर्वे करवाने के लिए भेजा जाएगा।
दरमेढा गांव के पीछे की पहाड़ी से लगभग दो सप्ताह से भूस्खलन हो रहा है और गांव के 14 परिवारों के करीब 60 सदस्य दशहत में हैं। उनकी सुरक्षा के लिए प्रशासन ने टेंट भी वितरित किए हैं। उनके लिए रोपा में ग्रेट हिमायलन नेशनल पार्क के रेस्टहाउस में ठहरने की व्यवस्था की है। इसमें कुछ लोग रेस्ट हाउस में तो कई लोग अपने नजदीक के रिश्तेदारों के यहां रुकने को मजबूर हैं। ग्रामीण चेत राम व रामेश्वर ठाकुर ने कहा कि खतरा टला नहीं है। गांव के पीछे से भूस्खलन का दौर जारी है। बंजार की तीर्थन घाटी के घलियाड़ गांव के पीछे पहाड़ी से भी लगातार भूस्खलन हो रहा है। गांव के मकानों को खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पहले ही गांव के 10 मकानों को खाली करवा दिया है। परिवारों को सुरक्षित स्थानों में टेंट लगाकर ठहराया जा है।
प्रशासन की दरमेढा व घलियाड़ गांव पर नजर है। गांवों के लोगों को टेंट दिए गए हैं। दोनों गांवों का भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम से सर्वे करवाया जाएगा।– पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी, बंजार, कुल्लू
