शिमला। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कई अहम चिंताएं सामने आई हैं। वर्ष 2024-25 में राज्य की राजस्व प्राप्तियों का 86 फीसदी हिस्सा वेतन-पेंशन, अन्य प्रतिबद्ध खर्चों और सब्सिडी में चला गया। इसके चलते विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे में पूंजीगत निवेश के लिए वित्तीय गुंजाइश सीमित रही।


कैग की वर्ष 2024-25 की राज्य की वित्तीय स्थिति पर रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के सामने बढ़ते कर्ज, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे के साथ-साथ बजट प्रबंधन की चुनौतियां भी बनी हुई हैं।


9.20 फीसदी बढ़ी जीएसडीपी, फिर भी देश की जीडीपी में हिस्सेदारी घटी
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 9.20 फीसदी की वृद्धि हुई। इसके बावजूद देश की कुल जीडीपी में हिमाचल की हिस्सेदारी घटकर 0.70 फीसदी रह गई।


इस दौरान राज्य की राजस्व प्राप्तियों में 4.34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें जीएसटी समेत कर संग्रह में बढ़ोतरी और केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ने का योगदान रहा। गैर-कर राजस्व में भी 22.40 फीसदी की वृद्धि हुई, लेकिन केंद्र से मिलने वाले अनुदान में कमी आई।


कैग ने कहा कि राज्य के अपने राजस्व प्रदर्शन में सुधार हुआ है, लेकिन केंद्रीय अनुदानों पर निर्भरता अभी भी काफी अधिक है।
राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रतिबद्ध खर्च में
कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य के राजस्व व्यय में करीब 70 फीसदी हिस्सा प्रतिबद्ध खर्चों का रहा। वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे खर्चों के साथ सब्सिडी ने राजस्व प्राप्तियों का 86 फीसदी हिस्सा खर्च कर दिया।


बिजली सब्सिडी और कर्ज राहत जैसे उपायों के कारण सब्सिडी में भी वृद्धि हुई। इसका सीधा असर विकास कार्यों और पूंजीगत निवेश के लिए उपलब्ध धन पर पड़ा।
6,804 करोड़ का राजस्व घाटा
वर्ष 2024-25 में हिमाचल का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये रहा, जो जीएसडीपी का 2.94 फीसदी है।


वहीं राज्य का राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जीएसडीपी का 5.44 फीसदी है। कैग के अनुसार दोनों घाटे राज्य के वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून में तय लक्ष्यों के दायरे में नहीं रह पाए।


कर्ज का बोझ भी बड़ी चिंता
कैग ने राज्य की बकाया देनदारियों को भी चिंता का विषय बताया है। रिपोर्ट के अनुसार जीएसडीपी के मुकाबले राज्य की बकाया देनदारियां 15वें वित्त आयोग के निर्धारित लक्ष्य और राज्य के बजट अनुमान से काफी अधिक रहीं।


कैग ने यह भी कहा कि स्थिति को सरकार की गारंटियों से जुड़ी आकस्मिक देनदारियों के साथ देखा जाना चाहिए। इसके अलावा ब्याज वाले जमा और रिजर्व फंड में पड़ी राशि से जुड़ी पुरानी देनदारियां भी वर्ष 2024-25 में निपटाई नहीं जा सकीं।
कैग ने क्या सलाह दी?


कैग ने राज्य को वित्तीय दबाव कम करने के लिए नए कर्ज लेने पर नियंत्रण रखने और पुराने ऋण चुकाने के लिए नई उधारी पर निर्भरता से बचने की सलाह दी है।


इसके साथ ही राजस्व और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए स्पष्ट रोडमैप लागू करने, एफआरबीएम कानून का पालन, पूंजीगत खर्च बढ़ाने और वेतन-पेंशन व ब्याज जैसे खर्चों पर नियंत्रण की सिफारिश की गई है।