
ऑरेंज अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई भागों में बारिश लगातार जारी है। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। चंबा जिले के भटियात क्षेत्र के तहत कामला में भूस्खलन से बोलेरो गाड़ी सड़क के बीचोंबीच फंस गई। गाड़ी में सवार लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। वहीं चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत मंगली के भोड़ास गांव में पहाड़ी से हुए भूस्खलन की चपेट में कुछ मकान आए हैं। चुराह उपमंडल का तरेला-बौदेड़ी-मंगली जुनास घारे के समीप बंद हो गया। चुराह उपमंडल का शिकारी मोड़-गनेड़-बिहाली मार्ग गनेड़ नाला में बंद होने से लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। कांगड़ा जिले में भी भारी बारिश से कई सड़कें ठप हो गई हैं। शिमला में भी माैसम खराब बना हुआ है।
राज्य में बुधवार सुबह 10:00 बजे तक भूस्खलन से 343 सड़कें ठप रहीं। 551 बिजली ट्रांसफार्मर व 186 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। मंडी जिले में सबसे ज्यादा 217 सड़कें व 155 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित हैं। चंबा जिले में 279 व कुल्लू जिले में 111 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित हैं। माैसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से आज कई भागों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 31 जुलाई से 5 अगस्त तक के लिए कई क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। बीती रात भटियात में 182.6, पालमपुर 157.0, कांगड़ा 115.8, जोत 85.0, नादौन 76.4, पंडोह 63.5, देहरा गोपीपुर 52.2, गोहर 38.0, पच्छाद 37.3, जोगिंद्रनगर 36.0, चंबा 29.0, धर्मशाला 28.4, नयना देवी 22.6, जुब्बड़हट्टी 21.4, सराहन 20.5, जटाैन बैराज 20.4, सोलन और रोहड़ू 20.0 व कोठी में 18.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 29 जुलाई तक 170 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 278 लोग घायल हुए हैं। 36 लोग अभी भी लापता हैं। इस दाैरान 76 लोगों की सड़क हादसों में माैत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 1,646 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 1,187 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,402 पालतु पशुओं की माैत हुई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 1,53,838.54 लाख रुपये पहुंच गया है।
सोमवार रात से जारी मूसलाधार बारिश के चलते बुधवार सुबह करीब 4:00 बजे 9 मील और कैंची मोड़ के पास चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर फिर भूस्खलन हुआ। इससे हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। जानकारी देते हुए पंडोह पुलिस चौकी के प्रभारी अनिल कटोच ने बताया कि तेज बारिश के चलते रात में मलबा हटाने का कार्य शुरू नहीं हो पाया। सुबह 6:00 बजे के करीब संबंधित कंपनी की मशीनरी मौके पर पहुंची और मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। लगभग 8:00 बजे तक मार्ग को एकतरफा यातायात के लिए खोल दिया गया। पुलिस की निगरानी में फंसे हुए वाहनों को सुरक्षित निकाला गया।
यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करें और अनावश्यक जोखिम न उठाएं। बता दें, मंडी से औट तक चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे का यह हिस्सा लगातार भूस्खलन की चपेट में आ रहा है। बीते कुछ दिनों से जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। इससे मार्ग बेहद खतरनाक बन चुका है और आए दिन यातायात प्रभावित हो रहा है। प्रशासन और पुलिस विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान पहाड़ी मार्गों पर यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे केवल आवश्यक होने पर ही इस मार्ग का उपयोग करें। चंबा जिले के चुराह उपमंडल की शिकारी मोड़-गनेड़-बिहाली सड़क गनेड़ नाला का जल स्तर बढ़ने से बाधित हो गई है।
कांगड़ा जिले में लगातार बारिश से कई सड़कों पर यातायात ठप हो गया है। शाहपुर मंडल में ही 11 सड़कें बाधित हैं। जिले में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर है। धर्मशाला व कांगड़ा उपमंडल में भी कई सड़कें भूस्खलन से प्रभावित हैं। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि अति आवश्यक न हो तो यात्रा न करें। जिला प्रशासन राहत दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
