
कारगिल युद्ध के बलिदानी कैप्टन अमोल कालिया की यादों को ताजा रखने के लिए परिवार ने उनकी हर चीज को सहेज कर रखा है। इसमें एक मारुति कार भी है। परिवार ने मकान की छत पर एक तोप का मॉडल भी बना कर रखा है, जिसका मुंह पाकिस्तान की तरफ किया गया है। बलिदानी कैप्टन अमोल कालिया मेमोरियल सोसायटी हर साल शहीद कै. अमोल कालिया के जन्मोत्सव और शहीदी दिवस को उत्साह के साथ मनाती है।
अमोल कालिया के बड़े भाई अमन कालिया भी देश सेवा में तत्पर हैं। वह वायु सेना में बतौर ग्रुप कैप्टन तैनात हैं और इस वक्त राजस्थान के सूरतगढ़ में सेवाएं दे रहे हैं। खास है कि अमोल कालिया और अमन कालिया का कमीशन वर्ष 1995 में हुआ था। कारगिल युद्ध में अमन कालिया ने अपने छोटे भाई को खो दिया। अमोल कालिया मूलत: ऊना जिले के चिंतपूर्णी के थे और उनका परिवार नया नंगल पंजाब में रहता है। अमोल कालिया और अमन कालिया के बाद अगली पीढ़ी भी सेना में जाने की तैयारी में है। शहीद कैप्टन अमोल कालिया को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने करीब साढ़े तीन साल भारतीय सेना में सेवाएं दी।
कैप्टन अमोल कालिया के पिता सतपाल कालिया का कहना है कि हाल ही में भारत की ओर से किए ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने शानदार कार्य किया। डॉ. कालिया कहते हैं कि अब उम्र हो गई है, लेकिन बेटे की बहादुरी से सीना चौड़ा हो जाता है।
अमोल कालिया स्वामी विवेकानंद को अपना अपना आदर्श मानते थे और बलिदान के समय पर भी उनके पार्थिव शरीर से उनकी जेब से स्वामी विवेकानंद का प्रेरक संदेश मिला था। उसमें लिखा था ..विश्वास करो कि तुम महान हो और महान कार्यों के लिए ही तुम्हारा जन्म हुआ है। तुम कुत्तों के भौंकने से न डरो, न ही बिजली के गड़गड़ाने से घबराओ, उठो काम करो, तुम्हारे देश को वीर नायक चाहिए। वीर बनो चट्टान की तरह स्थिर रहो। सत्य की सर्वदा विजय होती है। बहादुर बनो, बहादुर बनो… मनुष्य केवल एक ही बार मरता है, विद्युतीय संचार से नवप्राण भर दो।
