हिमाचल प्रदेश सरकार ने विभागों और सरकारी एजेंसियों में आउटसोर्स आधार पर होने वाली भर्तियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्सिंग केवल अस्थायी और आवश्यकता आधारित व्यवस्था होगी, इसे नियमित सरकारी रोजगार का विकल्प नहीं माना जाएगा। प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को संशोधित निर्देश जारी किए हैं।

ये है नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत जिन पदों पर नियमित भर्ती हो चुकी है या स्वीकृत पद भरे हुए हैं, वहां आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी। विभागों को स्थायी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आउटसोर्सिंग का दायरा केवल अस्थायी, गैर कोर, मौसमी और विशेष सेवाओं तक सीमित रहे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी फिलहाल अपनी सेवाएं देते रहेंगे, लेकिन उनकी सेवाएं नियमित भर्ती पूरी होने तक अस्थायी आधार पर ही जारी रहेंगी। विभाग समय-समय पर इनकी आवश्यकता की समीक्षा भी करेंगे।

अब वित्त विभाग की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना किसी भी विभाग या सरकारी एजेंसी में नई आउटसोर्स नियुक्ति, तैनाती या सेवाएं नहीं ली जा सकेंगी। बिना मंजूरी की गई नियुक्तियों को अनधिकृत माना जाएगा। वित्त विभाग के अनुसार ये संशोधित निर्देश प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक रोजगार से जुड़े कानूनी प्रावधानों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं।

प्रदेश में वर्तमान में 26 हजार से अधिक कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती संबंधी हलफनामा भी मांगा था।