मंडी जिले के नाचन क्षेत्र के सरोआ स्थित प्रसिद्ध माता जालपा भगवती मंदिर में सायर पर्व पर आस्था और देव परंपरा का अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां माता के गूर बिंदर कुमार ने मंदिर की छत से श्रद्धालुओं पर अखरोट बरसाए। अखरोट पाने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।


श्रद्धालुओं ने इन अखरोटों को माता का प्रसाद और आशीर्वाद मानकर ग्रहण किया। भक्तों ने माता के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। अखरोट बरसाने की इस परंपरा के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आया।


सदियों से चली आ रही है अखरोट बरसाने की परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार सायर पर्व पर माता जालपा भगवती की दिव्य शक्ति उनके गूर पर उतरती है। इसके बाद गूर मंदिर की छत से श्रद्धालुओं पर अखरोट बरसाते हैं। मान्यता है कि माता की कृपा के प्रतीक इन अखरोटों को प्रसाद के रूप में घर ले जाने से सुख-समृद्धि बनी रहती है।


माता के गूर बिंदर कुमार के अनुसार अखरोट बरसाने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर वर्ष सायर पर्व पर इस अनोखी देव परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।


लोकगीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से गूंजा मंदिर परिसर
सायर पर्व के चलते सरोआ में दिनभर धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ लोकगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें गूंजती रहीं। घंटियों की मंगल ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया।


स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
करीब एक माह बाद खुले देवस्थलों के कपाट
सायर पर्व के अवसर पर करीब एक माह बाद कमरुघाटी के कई देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इनमें बड़ा देव कमरुनाग, शिकारी माता और जालपा माता सहित अन्य प्रमुख देवस्थल शामिल रहे।


कपाट खुलते ही मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू हो गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर आशीर्वाद लिया। सायर पर्व के साथ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं और मंदिरों में भक्तों की आवाजाही भी बढ़ गई।