हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज है। क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के बीच मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला फिलहाल आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के नाम पर पहले से चर्चा है, लेकिन मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर नए सवाल सामने आए हैं।


मौजूदा चर्चा में सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाए जाने का प्रमुख आधार मंडी संसदीय क्षेत्र और कुल्लू जिले को प्रतिनिधित्व देना बताया जा रहा है। हालांकि, मंत्रिमंडल में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी पार्टी के भीतर विचार-विमर्श की बात सामने आई है।


किस सामाजिक वर्ग का कितना प्रतिनिधित्व?
रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में राजपूत, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, ओबीसी और अनुसूचित जनजाति समेत विभिन्न सामाजिक वर्गों की आबादी और मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा जा रहा है। मौजूदा मंत्रिमंडल में राजपूत समुदाय से कई चेहरे हैं, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से धनीराम शांडिल और यादविंद्र गोमा मंत्री हैं। ब्राह्मण समुदाय से उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और मंत्री राजेश धर्माणी हैं, जबकि चंद्र कुमार ओबीसी वर्ग से हैं।
ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में नए चेहरे को शामिल करने के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन साधना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सुंदर सिंह ठाकुर के नाम के पीछे क्षेत्रीय समीकरण
सुंदर सिंह ठाकुर के नाम की चर्चा के पीछे कुल्लू को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने का तर्क प्रमुख है। उनके समर्थकों की ओर से यह कहा जाता रहा है कि मौजूदा सरकार में कुल्लू जिले को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है, जबकि पिछली कई सरकारों में जिले का प्रतिनिधित्व रहा है।


मंडी संसदीय क्षेत्र से वर्तमान में जगत सिंह नेगी मंत्रिमंडल में शामिल हैं। ऐसे में कुल्लू से प्रतिनिधित्व देने को क्षेत्रीय संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।


30 सितंबर के बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद
सितंबर की शुरुआत में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी हाईकमान से चर्चा की थी और सुंदर सिंह ठाकुर के नाम को लेकर फैसला होने की बात रिपोर्टों में सामने आई थी।


वहीं, सितंबर के दूसरे सप्ताह की रिपोर्टों के अनुसार पार्टी हाईकमान ने मंत्रियों की कार्यप्रणाली और संभावित बदलावों को लेकर रिपोर्ट मांगी है तथा 30 सितंबर तक प्रक्रिया को लेकर समयसीमा की चर्चा है। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ कुछ विभागों में फेरबदल की संभावना भी बताई जा रही है।


हालांकि, अंतिम फैसला हाईकमान और मुख्यमंत्री के बीच विचार-विमर्श के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में किन चेहरों को जगह मिलती है और क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन के बीच सरकार किस तरह अंतिम समीकरण तैयार करती है।