
हिमाचल में एंटीबायोटिक रजिस्टेंस का बढ़ता खतरा, IGMC के अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
हिमाचल प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के जरूरत से ज्यादा और बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) शिमला में वर्ष 2025 के दौरान किए गए एक अध्ययन में एंटीबायोटिक रजिस्टेंस से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
अध्ययन में 14,312 मरीजों के सैंपलों की जांच की गई। इसमें करीब 45 फीसदी मामलों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर इस्तेमाल की जा रही एंटीबायोटिक दवाएं असरदार नहीं मिलीं। वहीं, यूरिन संक्रमण से जुड़े मामलों में भी करीब 51 फीसदी सैंपलों में संबंधित बैक्टीरिया पर दवाओं के बेअसर होने की बात सामने आई।
बिना सलाह दवा लेना और कोर्स अधूरा छोड़ना चिंता का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक रजिस्टेंस बढ़ने का एक प्रमुख कारण बिना चिकित्सकीय सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल करना है। कई बार मरीज दवा लेने के बाद थोड़ी राहत महसूस होने पर उसका कोर्स बीच में ही छोड़ देते हैं। इससे बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम होने की समस्या बढ़ सकती है।
इसका असर यह हो रहा है कि कुछ संक्रमणों के इलाज में चिकित्सकों के सामने भी मुश्किलें बढ़ रही हैं और कई मामलों में अधिक प्रभावी या उच्च डोज वाली दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
ICU के मरीजों में संक्रमण का खतरा
अध्ययन के दौरान ICU में भर्ती मरीजों के रक्त, यूरिन और बलगम के कल्चर सैंपलों की जांच की गई। जांच में यह भी सामने आया कि ICU में 48 घंटे से अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों में अस्पताल जनित संक्रमण का खतरा काफी अधिक देखा गया।
विशेषज्ञों ने सुझाए ये कदम
एंटीबायोटिक रजिस्टेंस को नियंत्रित करने के लिए बिना कल्चर टेस्ट के कुछ दवाओं के इस्तेमाल पर नियंत्रण, प्रिस्क्रिप्शन का नियमित ऑडिट और ICU में संक्रमण रोकने के लिए सख्त सैनिटाइजेशन जैसे कदम सुझाए गए हैं।
कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. अमित सचदेवा ने एंटीबायोटिक दवाओं के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लोगों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है।
लोग कैसे बचें?
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी, जुकाम या बुखार होने पर खुद से एंटीबायोटिक दवा नहीं लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, चिकित्सक द्वारा निर्धारित एंटीबायोटिक का कोर्स अपनी मर्जी से बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।
