हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान स्क्रब टायफस का खतरा बढ़ने लगा है। शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस के पांच संदिग्ध मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं। सभी मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

चिकित्सकों के अनुसार इन मरीजों में तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण पाए गए हैं। जांच के दौरान सामने आया कि सभी मरीज खेतों में काम करने वाले हैं। फिलहाल उन्हें आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। राहत की बात यह है कि अभी तक अस्पताल में स्क्रब टायफस का कोई मामला पॉजिटिव नहीं पाया गया है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रब टायफस संक्रमित कीट के काटने से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है। यह कीट आमतौर पर घास, झाड़ियों और खेतों में पाया जाता है। ऐसे में खेतों में काम करने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग ने वायरल बुखार से पीड़ित कुछ अन्य मरीजों की भी सैंपलिंग करवाई है, ताकि बीमारी की सही पहचान कर समय पर उपचार शुरू किया जा सके।

  • 104 से 105 डिग्री तक तेज बुखार
  • जोड़ों और शरीर में तेज दर्द
  • कंपकंपी के साथ बुखार
  • शरीर में अकड़न और कमजोरी
  • गर्दन, बाजू या कूल्हों के ऊपर गांठें (गिल्टियां)
  • शरीर पर काले रंग के चकत्ते

कैसे करें बचाव?

  • खेतों में काम करते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
  • हाथ और पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें।
  • घर के आसपास घास-झाड़ियां और पानी जमा न होने दें।
  • तेज बुखार या शरीर दर्द होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
  • चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी का पालन करें

आईजीएमसी के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतें। यदि स्क्रब टायफस जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लें, क्योंकि समय पर उपचार से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।