सिरमौर जिले के चर्चित राजगढ़ सड़क निर्माण मामले की जांच अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए एक पूर्व विधायक को इस मामले की एफआईआर में नामजद करने की तैयारी कर रहा है। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में पूर्व विधायक की कथित मिलीभगत के संबंध में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक पूर्व विधायक पर अपने कारोबारी साझेदार के साथ सैकड़ों बीघा जमीन खरीदने के बाद वहां तक पहुंच के लिए सरकारी धन से निर्मित सड़क का कथित तौर पर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल कराने का आरोप है। जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि सड़क निर्माण स्वीकृत सीमा से आगे बढ़ाकर संरक्षित वन क्षेत्र और शामलात भूमि तक कैसे पहुंचा और इससे किसे लाभ मिला। जांच के क्रम में इसी माह संबंधित वन मंडलाधिकारी (डीएफओ), वन रक्षकों और अन्य विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शिमला स्थित विजिलेंस मुख्यालय तलब कर विस्तृत पूछताछ की जा चुकी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध सड़क निर्माण, वन भूमि पर अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई के दौरान विभागीय स्तर पर लापरवाही हुई या किसी स्तर पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई

इस मामले में एसवी एंड एसीबी थाना, नाहन में भारतीय न्याय संहिता और भारतीय वन अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत पहले ही एफआईआर दर्ज है। जांच एजेंसी दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी करा रही है। विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जांच साक्ष्य आधारित है। यदि किसी भी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी या प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

विजिलेंस इस मामले को केवल अवैध सड़क निर्माण तक सीमित नहीं मान रही, बल्कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, पर्यावरणीय उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी सुनियोजित साजिश के रूप में जांच रही है। विशेष जांच दल सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत सरकारी राशि के उपयोग, उससे जुड़े भुगतान, वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल की भी जांच कर रहा है।