शिमला: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ स्थित एक दवा निर्माण कंपनी के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन के आरोपों को गंभीर मानते हुए किइनवान प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया गया है। मामला औद्योगिक प्रदूषण, जल स्रोतों की सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों के पालन से जुड़ा होने के कारण काफी अहम माना जा रहा है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) लेते समय फॉर्म-II में गलत जानकारी दी। कंपनी ने दावा किया था कि उसकी इकाई से कोई अपशिष्ट जल नहीं निकलेगा और आसपास कोई जल स्रोत नहीं है, जबकि चिकनी खड्ड, जो सरसा नदी की सहायक धारा है, कंपनी के पास ही स्थित है।

इसके अलावा आरोप है कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) यूनिट होने के बावजूद कंपनी कथित रूप से अपशिष्ट जल और रासायनिक कचरा चिकनी खड्ड में छोड़ रही है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि स्वीकृत एक बोरवेल की जगह छह बोरवेल चलाकर भूजल का अधिक दोहन किया गया। साथ ही जहरीले अपशिष्ट जल से मछलियों की मौत और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के आरोप भी लगाए गए हैं।

आवेदकों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले कंपनी को क्लीन चिट दी थी, लेकिन बाद में कथित उल्लंघनों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अपने दावों के समर्थन में आवेदकों ने दस्तावेज, समाचार रिपोर्ट और तस्वीरें भी एनजीटी के समक्ष पेश की हैं।मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने माना कि यह प्रकरण पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। इसके बाद अधिकरण ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश 31 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।

वहीं, एक अन्य मामले में एनजीटी ने सिरमौर जिले में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों की शिकायत पर जिला प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।